Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।

Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।

Positive mental attitude
Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।

सकारात्मक मानसिक नजरिये के साथ आप किसी भी चुनौती का सामना आसानी से कर सकते हैं। (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) वाला व्यक्ति नकारात्मक बातों को भी सकारात्मक नजरिए से देखता है। Positive mental attitude यानी पी एम ए के साथ जीवन जीना आसान हो जाता है। सकारात्मक मानसिक नजरिया या सकारात्मक सोच आपको रचनात्मक बना देती है।

पी एम ए (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) एक चौतरफा प्रक्रिया है जिसमें सोचने का सही और संतुलित तरीका है। एक सफल चेतना, जीवन का एक समावेशी दर्शन और सही कार्यों व प्रतिक्रियाओं द्वारा इसे करते रहने की क्षमता इसमें शामिल है।

What is Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया। (पी एम ए) क्या है?

पी एम ए (positive mental attitude) का संक्षिप्त रूप है; लेकिन यह जीवन के आशावादी दृष्टिकोण से भी बढ़कर बहुत कुछ है। सकारात्मक मानसिक नजरिया (पी एम ए) एक अवधारणा है। इसको 1973 में नेपोलियन हिल द्वारा उनकी पुस्तक Think and grow rich में पहली बार पेश किया गया था।

“यह मन की एक विश्वासपूर्ण, सही और रचनात्मक अवस्था है, जो कोई भी व्यक्ति चुनने के अपने तरीके द्वारा निर्माण करता है और उसे बनाए रखता है। इसे वह अपने अनुकूल प्रेरणा के आधार पर अपनी इच्छा – शक्ति के संचालन द्वारा करता है।”

– नेपोलियन हिल

सकारात्मक मानसिक नजरिया वह दर्शन है जो यह दावा करता है कि किसी के जीवन में हर स्थिति में एक आशावादी स्वभाव होने से सकारात्मक परिवर्तन आकर्षित होते हैं। और इससे उपलब्धियां भी बढ़ती हैं।

“पॉजिटिव मेंटल एट्टीट्यूड किसी भी परिस्थिति या परिस्थितियों के प्रति सही उचित सोच, क्रिया या प्रतिक्रिया है।”

— डब्ल्यू – क्लेमेंट स्टोन

यह अवधारणा नकारात्मकता, पराजय और निराशा के विपरीत है। Optimism और आशा पी एम ए के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) छोटी खुशियों में अधिक से अधिक आनंद पाने एवम् बिना हिचकिचाहट के जीने का दर्शन है। सकारात्मक मानसिक नजरिया द्वारा उच्च सम्मान, उच्च व्यक्तिगत गुणों और मूल्यों को धारण किया जा सकता है।

What does positive mental attitude do for you | पी एम ए आपके लिए क्या करेगा?

पी एम ए (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) के कारण आपके अंदर एक आशा बनती है। जो हतोत्साह और निराशाओं से उबरने में आपकी मदद करती है। पी एम ए के विकास और उसे बनाए रखने के कारण आपकी मानसिक दशा अन्य लोगों के प्रति स्वस्थ और उत्पादक बनी रहती है। ये आपको उस ओर प्रेरित करती है जो उपयोगी चीजें आप जीवन में हासिल करना चाहते हैं।

जब आपके पास सकारात्मक मानसिक नजरिया होता है तो आप अपने आप से और दूसरों से खुश रहते हैं। आपके अंदर वह आंतरिक भाव, आंतरिक प्रकाश और आंतरिक मनोदशा होती है जो आपको आत्म सम्मान और उपयोगी भावनाएं देती है। सकारात्मक भाव और परिस्थितियां आपकी ओर आकर्षित होती हैं और नकारात्मक परिस्थितियां आपसे दूर भाग जाती हैं।

सकारात्मक मानसिक नजरिए का प्रभाव स्वचालित होता है लेकिन इसको हासिल करना स्वचालित नहीं होता है। इसके विकास के लिए एक निरंतर प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप अपनी सुविधानुसार प्रयोग कर सकते हैं। (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) आपकी आदत बन जानी चाहिए। आप में इतनी अंतर्निहित कि आप इसे हमेशा दिखाएं।

Individuals who developed positive mental attitude | पी एम ए को विकसित करने वाले व्यक्ति।

पी एम ए की धारणा के विकास और उसे परिष्कृत करने में अनेक लोगों ने योगदान दिया है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के स्नातक विलियम जेम्स जो विश्वविद्यालय में मानव शरीर विज्ञान, फिजियोलॉजी, मनोविज्ञान एवम् दर्शन पढ़ाते थे। उन्होंने एक विचार – प्रणाली विकसित करने में मदद की, जिसे ‘प्रैगमैटिज़्म’ कहा जाता है। प्रैगमैटिज्म के विचारों के अनुसार परिणाम का ही महत्त्व है। और विचार कार्यों के दिशा – निर्देशक हैं।

“जीवन से भयभीत न हों। इस बात पर विश्वास करें कि जीवन जीने योग्य है — और आपका विश्वास उस तथ्य का निर्माण करेगा।”

– विलियम जेम्स

जीवन आशावाद और निराशावाद के बीच का एक संघर्ष है। उन्होंने कहा है कि यह संसार संभावनाओं से भरा है। लोग स्वयं में व्यापक रूप से सुधार कर सकते हैं, यदि वे अपनी आंखें खोलें और अपने भीतर के मस्तिष्क की क्षमता को ढूंढें।

हम सभी इस बारे में सोचते हैं कि हमारा भविष्य कैसा होगा। हम वही बन जाते हैं जो कि अधिकांश समय हम सोचते हैं। हमारी पीढ़ी में सबसे बड़ी क्रांति मनुष्य की यह खोज है कि अपने मस्तिष्क के आंतरिक भावों को बदलकर हम अपने जीवन के बाहरी पक्षों को भी बदल सकते हैं। एंड्रयू कार्नेगी में एक सनक थी। उनका यह मानना था कि जीवन में कोई भी ऐसी चीज, जिसे आप हासिल करना चाहते हैं, उसके लिए काम करना चाहिए।

Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया को विकसित किया जाना चाहिए और इसका प्रयोग किया जाना चाहिए। वे लोग, जो अपने काम और जीवन के प्रति positive mental attitude विकसित नहीं करते हैं, वे खुश नहीं रहते हैं। कई लोगों को मानसिक बीमारियां हो जाती हैं और वे शीघ्र घबरा जाते हैं; क्योंकि वे जीवन में आने वाली परेशानियों के सामने जल्दी से हथियार डाल देते हैं।

10 formulas to develop and maintain positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया को विकसित और बनाए रखने के 10 तरीके।

पीएमए (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) विकसित करने और इसे बनाए रखने के लिए यहां दस फार्मूले बताए जा रहे हैं। ये 10 तरीके न आपको सिर्फ पी एम ए के बारे में सिखाएंगे, बल्कि आपको इनका अभ्यास करने के लिए भी प्रोत्साहित करेंगे। सीखने से सम्बन्धित चीन की एक कहावत है —

“मैं सुनता हूं और मैं भूल जाता हूं। मैं देखता हूं और मुझे वह याद रहता है। मैं जब करता हूं तो यह मुझे समझ में आता है।”

सकारात्मक मानसिक नजरिया के विकास और इसे बनाए रखने के लिए इस दस सूत्री कार्यक्रम को अपने देखने व सुनने से भी ज्यादा चीजों की जरूरत होगी और वह है आपके द्वारा की जाने वाली कार्यवाही।

ये दस तरीके सूक्ष्मता से एक – दूसरे से जुड़े हुए हैं जो एक – दूसरे को मजबूत बनाते हैं। जरा सोचिए, अंग्रेजी साहित्य सिर्फ 26 अक्षरों से बना हुआ है। सभी रंग तीन प्राथमिक रंगों से ही बनते हैं। कल्पना करें, इनमें से यदि कोई एक न हो तो क्या होगा।

ये दस तरीके किसी भी वस्तु के केंद्रबिंदु हैं। ये आपके करते हुए सीखने की कुंजी हैं। Positive mental attitude के प्राप्ति की दिशा में इन 10 सूत्री तरीकों का आप कैसे प्रयोग करते हैं। यह निःसंदेह आप पर निर्भर करता है। एक है —

  1. शुरू में सभी दस सूत्रों को ध्यान से पढ़िए।
  2. प्रतिदिन एक तरीके पर ध्यान दीजिए और उसे अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए।
  3. इस चक्र को दोहराइए। सीखने के लिए दोहराना महत्त्वपूर्ण है।

दूसरा विकल्प ये है कि इसके अभ्यास अंशों को हर सप्ताह के हिसाब से आप अपने कार्यों के रूप में करें। दस सप्ताह बाद आपको पी एम ए के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। जिससे आप अपने जीवन में आने वाली हर परिस्थितियों, घटनाओं और व्यक्तियों के साथ लागू करने में दक्ष हो जाएंगे।

पहला सूत्र : पूर्ण विश्वास के साथ अपने मस्तिष्क पर काबू कीजिए।

Positive mental attitude
Positive mental attitude

आपको पूर्ण विश्वास के साथ अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण रखना होगा। आपका मस्तिष्क इस ब्रह्मांड का एक महान आश्चर्य है। डब्ल्यू क्लेमेंट स्टोन के पर्यवेक्षण को याद रखिए कि आप शरीर के साथ मस्तिष्क हैं। आप अपने विचारों को निर्देशित कर सकते हैं, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर सकते हैं और अपना भाग्य बना सकते हैं।

“हम वही बनते हैं — जो हम अधिकांश समय सोचते हैं।”

– विलियम जेम्स

हम सभी के पास यह अद्भुत कोष है — मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र।  हर व्यक्ति जो ‘सामान्य’ है, उसे विरासत में वह शक्ति मिली है, जिसकी सहायता से जीवन में हर चीज, जो चाहे वह हासिल कर सकता है। आपकी भावनाएं, अंतर्निहित प्रवृत्तियां, मनोवृत्तियां और आदतें सब आपकी हैं, जिन्हें आप इस दिशा में निर्देशित कर सकते हैं।

आप इनका प्रयोग कैसे करते हैं यह आप पर निर्भर करता है। सभी स्वाभाविक शक्तियों की तरह इन छुपी हुई योग्यताओं में आपका भला करने की संभावनाएं हैं बशर्ते आप इनका प्रयोग सकारात्मकता से करें। आपके अंदर मस्तिष्क के इन यंत्रों को प्रभावशाली ढंग से और कुशलता से प्रयोग करने की शक्ति और योग्यता है। आप इन्हें निर्देशित या नियंत्रित कर सकते हैं। ये सब कुछ आप सकारात्मक मानसिक नजरिए का विकास करके कर सकते हैं।

आपके मस्तिष्क में दस अरब कोशिकाएं हैं जो कि इस संसार की कुल जनसंख्या से कहीं ज्यादा है। ये सभी कोशिकाएं आपस में एक – दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इनमें सभी आपके अनुसार कार्य करने के लिए बनी हैं। फिर भी सबसे बुद्धिमान व्यक्ति भी इस उपलब्ध शक्ति का पूरी तरह प्रयोग नहीं कर सकता है। आपके अंदर अपार मानसिक क्षमताएं हैं लेकिन यह आप पर निर्भर करता है। अपने मस्तिष्क की इस क्षमता का प्रयोग सकारात्मक सोच के रूप में करें, ताकि वे सब आपके फायदे के लिए काम करे।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“आप जो कुछ भी कर सकते हैं या जो भी सपना देख सकते हैं, उसे शुरू कीजिए। साहस में योग्यता, शक्ति और जादू है।”

जोहान गोथे

“परिस्थितियां — परिस्थितियां क्या हैं? परिस्थितियां तो मैं पैदा करता हूं।”

नेपोलियन

“मनुष्य का जन्म सफल होने के लिए हुआ है, विफल होने के लिए नहीं।”

हेनरी डेविड थोरियो

“भविष्य उन्हीं का है, जिन्हें अपने सपनों के सौंदर्य में विश्वास है।”

एलेनोर रूजवेल्ट

दूसरा सूत्र : अपने मस्तिष्क को उन चीजों पर केंद्रित कीजिए, जो आपको चाहिए और उन चीजों से दूर, जो आपको नहीं चाहिए।

जब आपका मस्तिष्क आपके नियंत्रण में आ जाता है तो उसे उन चीजों पर केंद्रित कर दीजिए, जो आप चाहते हैं और उन चीजों से दूर, जो आप नहीं चाहते हैं। एक पुरानी कहावत है — “एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है।” यदि आपके मन में कोई विचार आता है तो यह प्राय किसी चीज के घटित हुए चित्र के रूप में होता है, न कि आपके मन में चलते हुए किसी वाक्य के रूप में।

चित्रों और आकृतियों का आपकी भावनाओं और आवेश पर सीधा, मौलिक और प्राथमिक आकर्षण होता है; जबकि शब्दों के प्रति अप्रत्यक्ष आकर्षण होता है। इसलिए आपको अपने विचारों को अनुशासित करना और जो चीज आप चाहते हैं, उनकी कल्पना करना सीखना चाहिए।

परेशानी की स्थिति में भी positive mental attitude के विकास में मदद करने का यह तरीका आप समझ लीजिए कि बीती घटना को आप बदल नहीं सकते। लेकिन वर्तमान और भविष्य में जो होने वाला है उसे आप प्रभावित कर सकते हैं। अपने आप से यह कहिए, “जो कुछ भी होता है वह अच्छे के लिए होता है और वह श्रेष्ठ है।” अब यह देखने के लिए काम कीजिए कि उस अनुभव से क्या अच्छे परिणाम निकल सकते हैं।

अपने मस्तिष्क को उन चीजों पर केंद्रित रखिए, जो आप अपने जीवन में हासिल करना चाहते हैं या जिस चीज के लिए आप ख्याति प्राप्त करना चाहते हैं। अपने मस्तिष्क का प्रयोग नियंत्रित आशावादी विचारों के लिए कीजिए। परिस्थितियों या लोगों को अपने भीतर नकारात्मक भाव पैदा न करने दीजिए। अपने मस्तिष्क को नियंत्रण में लीजिए और अपने मनोनुकूल आकृतियों पर इसे केंद्रित कर दीजिए।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“उसने पूरे मनोयोग से यह किया और वह सफल हुआ।”

क्रोनिक्लस, 31 : 21

“चलो, गाते हुए चलें, जितनी दूर भी जाना है। रास्ता कम थकाऊ होगा।”

— वर्जिल 

“वह काम जो मैं करता हूं, तो उन सभी चीजों को भूल जाता हूं, जो पीछे हैं; और उन चीजों को प्राप्त करने का प्रयास करता हूं, जो सामने हैं।”

— फिलिपिअन, 3 : 13

“हमारी शंकाएं विश्वासघातक होती हैं और इसके कारण हम उन अच्छी चीजों को खो देते हैं, जो प्रायः हम जीत सकते थे; क्योंकि हम प्रयास करने से डर जाते हैं।”

विलियम शेक्सपियर

“वह चीज जरुर होती है, जिसमें आपको सचमुच विश्वास होता है, और उस चीज में आपका विश्वास ही उसके होने का कारण होता है।”

फ्रैंक लिलोआइड राइड

“इस तरह काम कीजिए, मानो असफल होना असंभव है।”

ड्रोथिआ ब्रांडे

तीसरा सूत्र : स्वर्णिम नियम का सहारा लीजिए।

आप दूसरों के साथ भी वैसा ही व्यवहार कीजिए, जैसा कि आप दूसरों से अपने लिए अपेक्षा करते हैं। हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में निरंतर अच्छी चीज की तलाश कीजिए। दूसरों की सहायता कीजिए, प्रशंसा कीजिए और उत्साहवर्धन कीजिए, न कि आलोचना या आरोप लगाएं। किसी की मदद करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कीजिए।

Positive mental attitude की धारणा यह है कि यदि कोई व्यक्ति खुश है या नाखुश है, या अत्यंत दयनीय स्थिति में है। उसका मनोभाव स्वयं और दूसरों के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक है, इसके संबंध में जो एक छोटा सा अंतर है वही बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है।

लिलोऑइड सी. डगलस की पुस्तक ‘द मैग्निफिसेंट ऑबशेसन’ में इस बात को रेखांकित किया गया है कि जब आप किसी अन्य को बिना अहंकार के या व्यक्तिगत लाभ की खुशी देते हैं तो आपको इसके बदले में बार – बार खुशी मिलती है।

‘बिगजिम’ डेनियल को खुश रहने की ताकत मालूम है। सन् 1976 में उनके टाइटेनियम बनाने वाली कंपनी आर. एम. आइ. में आने से पहले यह कंपनी बहुत ही बुरी हालत में थी। नए अध्ययन के रूप में तब से डेनियल ने इसकी स्थिति ही पलट दी। वह यह बदलाव कैसे लाए? किसी कंप्यूटर, परामर्शदाता, प्रबंध स्नातकों का सहारा लेकर नहीं, बल्कि अपने positive mental attitude के बल पर।

श्रीमान डेनियल का दर्शन काम करता है। दूसरों के साथ साझेदारी करके आप अपना एक हिस्सा उन्हें देते हैं और आपके पास जो बच जाता है, वह कई गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही आप दूसरों को उच्चतर और अधिक रचनात्मक जीवन के प्रति चुनौती देते हैं। दूसरों की मदद करके बदले में आपने स्वयं की मदद की है। इसके साथ ही आपने सद्भावना और पॉजिटिव मेंटल एट्टीट्यूड की श्रृंखला प्रतिक्रिया को भी गतिशील कर दिया है।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“घृणा से कलह पैदा होती है; लेकिन प्रेम सभी पापों को ढंक लेता है।”

— प्रोवर्बस, 10 : 12

“जिस चीज की आप दूसरों से अपने प्रति अपेक्षा नहीं करते हैं, वह दूसरों के साथ भी नहीं कीजिए।”

— कन्फ्यूशियस

“हमें दूसरों के उपकार स्वीकार करने से मित्रता नहीं मिलती है, बल्कि उनके प्रति उपकार करके मिलती है।”

— थूसिडाइडस

“बहुत सारे लोग किसी चीज की तब तक परवाह नहीं करते हैं, जब तक कि वह उनके साथ नहीं होता है।”

— विलियम होवार्ड टेफ्ट

चौथा सूत्र : आत्म – परीक्षण करके सभी नकारात्मक विचारों को निकालिए।

जब आप अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण प्राप्त करने और अपनी कल्पना – शक्ति के बल पर इसे अपनी मनचाही दिशा में मोड़ने में विफल हो जाते हैं। तो इस बात की बहुत संभावना है कि प्रतिक्रियाएं नकारात्मक होंगी, न कि सकारात्मक। आत्म – मूल्यांकन की प्रक्रिया सरल है। बस स्वयं से पूछिए, “क्या यह सकारात्मक है या नकारात्मक?”

स्वर्णिम नियमों का पालन आपके लिए सकारात्मक सहायता है। विशेष रूप से आप सकारात्मक मानसिक नजरिये के विकास की उत्तेजक प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं; लेकिन पुरानी आदतें समय – समय पर आप पर हावी होगी।

आप जितना ज्यादा positive mental attitude का अभ्यास करते हैं, उतना ही अधिक आप नकारात्मक विचारों को पहचानने में समर्थ होंगे; जैसे ही वे उत्पन्न होंगे। लेकिन आप ज्यों ही सकारात्मक मानसिक नजरिया को अपने जीवन में सम्मिलित करने की महान प्रक्रिया की शुरुआत करते हैं, आपको सजग विश्लेषण पर और अधिक निर्भर रहना पड़ेगा।

जीवन के प्रति एक दृष्टिकोण है, जिसे कहते हैं, ‘बहाव के साथ बह जाओ’, जो कभी – कभी तो बड़ा आकर्षक लगता है। क्योंकि इससे लगता है कि तनाव और चिताएं दूर हो जाती हैं। लेकिन कभी – कभी ये आपके व्यक्तिगत और आपकी क्षमताओं को ढंक लेने वाले नकारात्मक संदेशों की श्रृंखला भेजता है। इनमें पर्याप्त मात्रा में कभी – कभी दया भाव भी होता है।

Positive mental attitude आपके मन में ऐसे विचार नहीं आने देता है। आपके मन में ये विचार आ तो सकता है; लेकिन जब आप इस पर विचार करते हैं तो आपको महसूस होता है कि काम और जिम्मेदारियों से बचने का यह एक तरीका है। जब यह प्रक्रिया होती है तो आप इन विचारों को नकारकर सकारात्मक सुझावों के साथ इसका सामना कर सकते हैं। जितना ज्यादा आप यह सजग रूप से करते हैं, उतना ही अधिक यह बाध्य होकर घटेगा।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“आत्म – विश्वास सफलता का पहला रहस्य है।”

— रॉल्फ वाल्डो एमरसन

“रहस्यपूर्ण दिवास्वप्न में खुद से कहिए, मैं चीजों को संभालने के लिए बनाया गया हूं।”

— एंड्रयू कार्नेगी

“अपने विरुद्ध कोई भी परिस्थिति मत बनाइए।”

— रॉबर्ट रोबॉटम

“जब कोई व्यक्ति बदला लेने पर आतुर होता है तो उसे और कुछ भी दिखाई नहीं देता है और यह इसके लिए उपयुक्त नहीं है।”

— लुइस लाएमर

“आपको हर उस अनुभव से शक्ति, साहस और भरोसा मिलता है, जब आप वास्तव में रुककर भय की नजर से नजर मिलाकर देखते हैं। आप खुद से यह कह पाते हैं, ‘ मैं इस भय में जीता रहा। अब मैं इसके साथ आने वाली अगली चीज का सामना कर सकता हूं। आपको वह कहना चाहिए, जो आप समझते हैं कि आप नहीं कर सकते हैं।”

— एलेनोर रूजवेल्ट

सूत्र पांच : खुश रहिए! दूसरों को भी खुश रखिए।

Positive mental attitude

खुश रहने के लिए खुशी का प्रदर्शन कीजिए। ठीक उसी तरह, जब आप किसी नए ढंग से स्वांग रचने के लिए सोचते हैं। आप नए विचार के लिए नए ढंग से काम कर सकते हैं। उत्साही बनिए, उत्साह का प्रदर्शन कीजिए। खुद पर और समस्त संसार पर हंसिए। अंततः आपको आंतरिक खुशी और उत्साह की भावना का अनुभव होगा और ये बिना आपके ध्यान केंद्रित किए ही प्रदर्शित होगा।

लोग सकारात्मक मनोवृत्ति वाले लोगों को पहचानते हैं और उनके आस – पास रहना चाहते हैं। आपके जीवन की गुणवत्ता में यह बदलाव तभी आता है, जब आप नकारात्मक विचारों को निकाल देते हैं। और अपने मस्तिष्क को अच्छे, पूर्ण रचनात्मक विचारों, स्मृतियों और अनुभव पर ध्यान केंद्रित रखते हैं। उल्लासपूर्ण मनोभाव बनाए रखना आसान है, क्योंकि सकारात्मक ढंग से सोचना उतना ही आसान है, जितना नकारात्मक ढंग से सोचना।

यदि आपको चिंता करनी है तो सकारात्मक ढंग से कीजिए। डॉ. मैक्सवेल ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब ‘साइको — साइबर्नेटिक्स’ में पाठकों को रचनात्मक रूप से चिंता करने के लिए बताया है। वह कहते हैं, “चिंता करना यह सोचना है — क्या गलत हो सकता है और इसका समाधान यह है कि जागरूक रूप से यह सोचना कि क्या सही हो सकता है।”

अपने आपको इस प्रकार देखिए मानो उन लक्ष्यों को आपने पहले ही प्राप्त कर लिया है। माल्टज का यह विश्वास है कि अवचेतन मन वास्तविक अनुभव और काल्पनिक अनुभव में अंतर नहीं कर पाता है।

जब कभी भी आप स्वयं को नकारात्मक विचारों से घिरा हुआ पाएं, तुरंत स्वयं को ऐसे विचारों को मन में आने से रोकने का आदेश दीजिए। फिर अपने मस्तिष्क में उन निराशाजनक चित्रों के स्थान पर वे चित्र बनाइए, जो वास्तव में आप अपने जीवन में ही होते देखना चाहते हैं। प्रयास कीजिए यह कारगर होता है।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“उल्लास आपको एक प्रकार के प्रकाश से प्रकाशित रखता है और वह इसे स्थिर व अनंत शांत चित्त से भर देता है।”

— जोसेफ एडीसन

“यदि आप किसी गुण की कामना करते हैं तो इस तरह कार्य कीजिए, मानो वह पहले से ही आपके पास है। मानो उपाय को अपनाने की कोशिश कीजिए।”

— विलियम जेम्स

“यदि हम सचमुच में जीना चाहते हैं तो बेहतर है कि हम शीघ्र ही प्रयास करना शुरू कर दें।”

— डब्ल्यू. एच. ओडीन

“अपनी कमजोरियों का प्रयोग कीजिए, बल की आकांक्षा कीजिए।”

— लोरेंस ओलिवियर

“श्रेष्ठ प्रदर्शक वे होते हैं, जो किसी भी प्रकार की परिस्थितियों का सामना इस मनोभाव के साथ करते हैं कि वे उन्हें इस ओर पलट देंगे, जिस ओर वे चाहते हैं। कभी – कभार नहीं, नियमित रूप से। वे खुद पर भरोसा करते हैं।”

— चार्ल्स गारफील्ड

छटा सूत्र : सहनशीलता की आदत डालिए।

लोग जैसे हैं, उन्हें उसी रूप में पसंद करने और स्वीकार करने की कोशिश कीजिए, न कि यह अपेक्षा या कामना कीजिए कि वे वैसे हो जाएं, जैसा आप चाहते हैं। लोगों के प्रति खुला मन रखिए। कई वर्षों पहले नेपोलियन हिल ने सहनशीलता पर यह लेख लिखा था —

” जब बुद्धि का सवेरा मानव प्रगति के पूर्वी क्षितिज पर फ़ैल जाएगा और समय की रेत पर से अज्ञानता व अंधविश्वास के कदमों के निशान मिट जाएंगे, मनुष्य द्वारा किए गए अपराध पर लिखी गई किताब के अंतिम खंड में यह लिखा जाएगा कि उसका सबसे घृणित पाप असहिशुणता था।”

सबसे कड़वी असहनशीलता धार्मिक, जातीय और आर्थिक पक्षपातों और विचारों में भेद से उत्पन्न होती है। हे प्रभु! हम कब असहाय मानव एक – दूसरे को नष्ट करने के प्रयास की मूर्खता को समझेंगे; क्योंकि हम विभिन्न धार्मिक विश्वासों और जातीय प्रवृत्तियों का अनुसरण करते हैं।

प्यार व स्नेह से एक ऐसे मानसिक और भौतिक वातावरण का निर्माण होता है, positive mental attitude का विकास होता है। हर दिन कोई अच्छा काम कीजिए। यह हमारे लिए और आपके लिए एक अच्छी सलाह है। असहनशीलता का सबसे दुखद नतीेजा यह होता है कि जिन लोगों को इसका अनुभव हुआ है, वे प्रायः अन्य समूहों के बीच इसे फैलाते हैं।

यह सुनिश्चित कीजिए कि वे असहनशील विचार, जो आपको अन्य लोगों से मिले, वे आपके उन विचारों को अवरुद्घ न करें, जो आप प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी बाधा को पार करने वाला हमेशा कोई पहला व्यक्ति होता है, तो आप ही वो व्यक्ति क्यों नहीं हो सकते हैं?

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“कोई बुद्धिमान ही किसी बुद्धिमान को पहचान सकता है।”

— जिनोफेंस

“शिष्टता से कभी भी किसी का नुकसान नहीं हुआ है। यह सबसे सस्ती खुशी है, जिसकी कोई कीमत नहीं और यह बहुत कुछ देता है। इससे उन दोनों को खुशी मिलती है, जो देता है और जो प्राप्त करता है। इस तरह दया की तरह दुगुनी प्राप्ति होती है।”

— इरेसटस वाइमन

“बहुत सारे लोग यह सोचते हैं कि वे सोच रहे हैं, जबकि वे तो अपने पक्षपातों को मात्र पुनः व्यवस्थित कर रहे हैं।”

— विलियम जेम्स

सातवां सूत्र : स्वयं को सकारात्मक सलाह दीजिए।

Think positive

अपने मस्तिष्क को इस तरह से प्रशिक्षित कीजिए कि यह हर समय ही सकारात्मक भाव अभिव्यक्त करे। आपको यह मालूम होना चाहिए कि आप उन्हीं विचारों या भावनाओं को भौतिक सत्य के रूप में परिवर्तित करते हैं, जो हमेशा आपके मन में रहती हैं।

अपने शायद यह कहावत सुनी होगी, “आप मुझे वह बताइए, जिसके बारे में आप सोच रहे हैं और मैं आपको यह बताऊंगा कि आप कौन हैं।” इसमें विलियम जेम्स के इस कथन की गूंज मिलती है, ‘हम वही बनते हैं, जो हम अधिकांश समय सोचते हैं।’

आपका अवचेतन मन उन संदेशों को आपके चेतन मन को भेज सकता है या भेजेगा। धारणाएं, विचार, समस्याओं के समाधान — ये सभी आपके सजग ज्ञान में आने की प्रतीक्षा में रुके हुए उपहार हैं। इससे भी बढ़कर आपका मस्तिष्क ज्ञात और अज्ञात शक्तियों का भंडार है। आपका चेतन और अवचेतन दोनों मन तालमेल के साथ मिलकर एक साथ तभी काम कर सकते हैं जब आपको मालूम हो कि अपने मस्तिष्क को बुद्धिमानी के साथ कैसे प्रभावित करें।

नेपोलियन हिल और डब्ल्यू क्लीमेंट स्टोन ने अपनी पुस्तकें ‘success through a positive mental attitude’ में यह समझाया है कि सजग रूप से सकारात्मक मानसिक नजरिया बनाए रखने के लिए आपको अपने मस्तिष्क को प्राप्त होने वाले बाह्य उत्प्रेरक पर नियंत्रण रखना चाहिए।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“मानव को बहुत खुशी बड़े सौभाग्य से नहीं मिलती है, जो कभी – कभी ही होता है, जितनी कि दिन – प्रतिदिन होने वाली छोटी – छोटी चीजों से मिलती है।”

— बेंजामिन फ्रैंकलिन

“आपका मस्तिष्क जिस चीज की कल्पना कर सकता है और जिस पर विश्वास कर सकता है, पॉजिटिव मेंटल एट्टीट्यूड के साथ आप उसे हासिल भी कर सकते हैं।”

— नेपोलियन हिल

“महानता की आकांक्षा कीजिए। हम सभी जीवन के इस साहसपूर्ण सफर की सड़क पर एक बार यात्रा करने वाले हैं; लेकिन यदि आप इसे अच्छी तरह करते हैं तो एक बार ही काफी है।”

— जे. वारेन मैक्किलयूर

“मेरा सिद्धांत यह है कि अपने जीवन के लिए आप और सिर्फ आप ही जिम्मेदार हैं; लेकिन इस क्षण श्रेष्ठ करके अगले क्षण आप अपने आपको श्रेष्ठ जगह पहुंचा सकते हैं।”

— ओप्रा विनफ्रे

आठवां सूत्र : अपनी प्रार्थना की शक्ति का प्रयोग कीजिए।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस श्रेष्ठ सत्ता को, जिससे आप प्रार्थना करते हैं या क्या नाम देते हैं। जबतक कि आप यह स्वीकार नहीं कर लेते हैं कि पूरी संरचना की रचना एक व्यवस्थित प्रक्रिया द्वारा की गई है। आप इन तथ्यों में प्रतिक्रियाओं को देखते हैं कि सूर्य उगता है और ग्रह, तारे अंतरिक्ष के विशाल शून्य में नियमित और निश्चित मार्ग में परिक्रमा करते हैं।

एक बार जब आप विश्व की व्यवस्था को स्वीकार कर लेते हैं तो आप देखेंगे कि इसे समझा जा सकता है। और आप नियमों के भीतर काम करके इसे बदल भी सकते हैं। प्रार्थना वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा आप उस व्यवस्था के भीतर अपने स्थान को स्वीकार करते हैं और इसे बदलने के लिए अपने आपको तैयार करना शुरू कर देते हैं। आप जितना ज्यादा ईश्वर की उदारता को स्वीकार करते हैं, उतना ही अच्छा है।

विश्वास कीजिए कि ईश्वर वह सबकुछ सुनना चाहता है, जो आपके मन में है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई बात कितनी छोटी या बड़ी लगती है। प्रार्थना आत्मा के लिए एक कवच है, ईश्वर के लिए एक त्याग और शैतान के लिए एक सजा।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“प्रार्थना ईश्वर के सामने अपनी आत्मा को पूरी निष्ठा, स्नेह और समझदारी के साथ खोल देना है।”

— जॉन बनयान

“प्रार्थना को सुबह की कुंजी और शाम का ताला बनने दीजिए।”

— मैथ्यू हेनरी

“प्रार्थना स्वर्ग का द्वार है।”

— टॉमस ब्रुक्स

“किसी व्यक्ति के लिए प्रार्थना करना इतना स्वाभाविक है कि कोई भी सिद्धांत उसे ऐसा करने से रोक नहीं सकता है।”

— जेम्स, फ्रीमैन क्लार्क

“प्रार्थना दैवी जीवन की पहली सांस है। विश्वास करने वाली आत्मा की यह धड़कन है।”

— टी स्कॉट

“आपकी सबसे बड़ी ताकत प्रार्थना की ताकत में निहित है।”

– डब्ल्यू क्लेमेंट स्टोन

नौवां सूत्र : लक्ष्य निर्धारित कीजिए।

यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने जीवन से क्या अपेक्षा करते हैं। जब आप यह निश्चित कर लेते हैं तो आप अपने मस्तिष्क पर अपना नियंत्रण करते हैं और इसका प्रयोग अपने चुने हुए लक्ष्य तक पहुंचने के लिए करते हैं। आप इस ज्ञान के रोमांच का अनुभव कर सकते हैं कि कोई भी लक्ष्य या उद्देश्य, जिसे आप पूरा करना चाहते हैं, प्राप्त कर सकते हैं।

अपने लक्ष्य को निर्धारित करना अपने मस्तिष्क को उन चीजों पर लगाना है, जो आप चाहते हैं और उन चीजों से हटाना है, जो आप नहीं चाहते हैं, जिसकी कि सूत्र दो में व्याख्या की गई है। अपने लक्ष्यों को कागज की एक पर्ची पर लिखना है। कल्पना कीजिए कि आपने वो लक्ष्य प्राप्त कर लिए हैं। आशावादी सकारात्मक रूप से निरंतर उनको उद्धृत करते रहिए।

लक्ष्यों की प्राप्ति के आरंभिक बिंदु इन छह अक्षरों के शब्द Desire (इच्छा) में निहित है —

Determine (संकल्प कीजिए)।

Evaluate (मूल्यांकन कीजिए)।

Set (निर्धारित कीजिए)।

Identify (पहचान कीजिए)।

Repeat (दोहराइए)।

Each day (प्रतिदिन)।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“हजार मील की यात्रा की शुरुआत भी एक कदम से ही होती है।”

— लाओ-तजो

“हर अच्छा काम पहली नजर में असंभव लगता है।”

— टॉमस कार्लाइल

“इस संसार की महान चीजें वहां उतनी ज्यादा नहीं हैं, जहां हम रहते हैं; बल्कि हम जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वहां हैं।”

— ओलिवर वेंडल होल्मस

“उपलब्धि के चार कदम – उद्देश्यपूर्ण तरीके से योजना बनाईए, प्रार्थना के साथ तैयारी कीजिए, सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ें और लगातार करते रहें।”

— विलियम एवार्ड

“अधिकांश लोग असफल होने के लिए योजना नहीं बनाते हैं। वे योजना बनाने में असफल रहते हैं।”

— जॉन ए. वेकले

“मैं हमेशा कुछ बनना चाहता था; लेकिन मुझे और स्पष्ट होना चाहिए था।”

— लिली टॉमलिन

दसवां सूत्र : अध्ययन कीजिए, सोचिए और प्रतिदिन योजना बनाइए।

Positive mental attitude

आप जो भी अपने जीवन में चाहते हैं उसे प्राप्त करने के लिए सकारात्मक मानसिक नजरिए का विश्वास करें और उसे बनाए रखें। जीवन में सफल होने के लिए या positive mental attitude के विकास के लिए सेल्फ हेल्प बुक्स या motivational books का अध्ययन करें।

सफल व्यक्ति महत्त्वपूर्ण कार्य करने के लिए, विशेष रूप से वित्तीय लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से या व्यवसाय में सफल होने के लिए स्वयं सहायता के लिए सेल्फ हेल्प बुक्स पढ़ते हैं। या फिर वे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए सेल्फ हेल्प बुक्स पढ़ने के लिए समय निकाल ही लेते हैं।

यह भी पढ़ें :- प्रेरणा क्या है?

आप क्या पढ़ने जा रहे हैं? सबसे पहले तो कोई प्रेरणादायक स्वयं सहायता कार्य-प्रेरित संपादकीय, लेख या किताब पढ़िए। या कोई ऑडियो सुनिए। अपने लिए समय निकालें। अपने पास स्थाई नोटपैड रखें और उसमें आपके संकल्प, आत्म – प्रेरक व विचार लिखें। इसमें लिखी बातों को नियमित रूप से दोहराएं और उनका मूल्यांकन करें।

Scholarly statements | विद्वानों के कथन :-

“समय वह सबसे बहुमूल्य चीज है, जो कोई भी व्यक्ति खर्च कर सकता है।”

— लैर्टियस डायोजिनस

“आपको कभी भी यह समझ में नहीं आयेगा कि कितना पर्याप्त होता है, जबतक कि आपको यह नहीं मालूम कि पर्याप्त से अधिक कितना होता है।”

— विलियम ब्लैक

“कुछ लोग अवसर को नहीं पहचान पाते क्योंकि यह काम के छद्म रूप में उनके सामने आता है।”

— थॉमस अल्वा एडीसन

अपनी सफलता की कहानी लिखने के लिए तैयार हो जाइए। समय निकालिए, समय बचाइए। दिन का श्रेष्ठ समय अपने लिए, अपने विचार और अपनी योजना के लिए निकालिए।

दोस्तो हमारा ये लेख (Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।) पढ़कर आपको यदि अच्छा लगा हो या इससे आपकी जिंदगी में कुछ सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी। आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं।

— धन्यवाद —

4 thoughts on “Positive mental attitude | सकारात्मक मानसिक नजरिया।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *