One small step can change your life the kaizen way

One small step can change your life the kaizen way

One small step can change your life the kaizen way

जिंदगी का सफर संघर्षों से भरा होता है। जो इंसान इन परिस्थितियों में डटकर खड़ा रहता है वह जीत हासिल करता है। और परिवर्तन प्रकृति का नियम है लेकिन इंसान इस परिवर्तन से कतराता है। “One small step can change your life the kaizen way” एक पुस्तक है, जिसे रॉबर्ट माउरर ने लिखा है।

यह पुस्तक आपको बताएगी कि काइजन की शक्ति को कैसे उपयोग में लाएं। छोटे – छोटे कदमों का इस्तेमाल करके बड़े लक्ष्यों को कैसे हासिल करें। यह एक प्राचीन दर्शन है जिसका सार ताओ ते चिंग के इस शक्तिशाली कथन में है : ” एक हजार मील की यात्रा भी एक कदम से ही शुरु होती है।”

Definition of the Kaizen way | काइजन की परिभाषा :

काइजन एक प्राचीन दर्शन है। यह एक जापानी तकनीक है। इसमें वो छोटे – छोटे कदम या बातों को महत्त्व दिया जाता है जिन्हें अक्सर लोग नजरंदाज कर देते हैं। बड़ी जीत या बुलंदियों को एक दिन में या अचानक हासिल नहीं किया जा सकता है।

माना कि kaizen की जड़ें प्राचीन दर्शन से जुड़ी हैं, लेकिन ये भागमभाग भरी हमारी मॉडर्न लाइफ में उतना ही कारगर है। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए भी आपको जीरो से ही शुरुआत करनी पड़ेगी।

काइजन की दो परिभाषाएं हैं :

  1. किसी प्रक्रिया, आदत या प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए बहुत छोटे कदमों का इस्तेमाल करना।
  2. नए प्रोडक्ट्स और आविष्कारों को प्रेरित करने के लिए बहुत छोटे पलों का इस्तेमाल करना।

जब आप परिवर्तन के प्रति मस्तिष्क की वरीयता को सम्मान देते हैं तो परिवर्तन कितना आसान हो सकता है। Small steps के द्वारा आप कैसे अपने गोल्स अचीव कर सकते हैं? ये सब आपको आगे example के साथ बताएंगे।

The kaizen way के इस्तेमाल से आप सिगरेट पीने जैसी बुरी लत को छोड़ सकते हैं। इसकी जगह आप व्यायाम और सृजनात्मकता जैसी अच्छी हैबिट्स डाल सकते हैं। व्यवसाय में आप सीखेंगे कि कर्मचारियों को कैसे motivation | प्रेरणा दें।

The kaizen way : spiritual phase | काइजन : आध्यात्मिक पहलू।

Kaizen की शक्ति को जानने से पहले हम आज आध्यात्मिकता के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। आध्यात्मिकता से मतलब ईश्वर में आस्था से नहीं है बल्कि उद्देश्य के अहसास और संतुष्टि की भावना से है।

काइजन किसी के व्यवहार को बदलने या बढ़ाने की सफलता की रणनीति ही नहीं है। यह एक दर्शन या विश्वास तंत्र भी है। उद्देश्य या आत्मा के दो तत्व हैं जिनमें काइजन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है : सेवा और कृतज्ञता।

काइजन संस्कृति में हर कर्मचारी से कहा जाता है। कि वह हर दिन ऐसे तरीकों की तलाश करे, जिनसे प्रक्रिया या प्रोडक्ट को बेहतर बनाया जा सके। लागत कम करना, गुणवत्ता को बेहतर करना और मैं हमेशा दोहराता हूं, ग्राहक की सेवा करना।

एमेजॉन, स्टारबक्स और साउथवेस्ट एयरलाइंस जैसे सफल कॉर्पोरेशन हमेशा अपना परिचय देते हुए कहते हैं कि हम मूलतः सेवा के प्रति समर्पित हैं।

One small step | एक छोटा कदम :

यह विधि एक खुला रहस्य है, जो दशकों से जापानी कंपनियों के बीच फलता – फूलता रहा है। सारी दुनिया के लोग इसका प्रत्येक दिन इस्तेमाल करते हैं। यह लक्ष्य हासिल करने और उत्कृष्टता बनाए रखने की स्वाभाविक और सुंदर तकनीक है।

यह एक सहज तकनीक अब आपके व्यक्तिगत सपनों को साकार करने में आपकी मदद कर सकती है। जापानी कॉपोरेशंस अपने कारोबारी लक्ष्यों को हासिल करने और उत्कृष्टता को कायम रखने के लिए Kaizen की छोटी – छोटी तकनीकों का लंबे समय से इस्तेमाल कर रहे हैं।

“मेरी हसरत है कि मैं एक बड़ा ऊंचा और महान काम करूं, लेकिन मेरा प्रमुख कर्तव्य यह है कि मैं छोटे काम भी उस तरह करूं, जैसे कि वे बड़े ऊंचे और महान हों।”

— हेलेन केलर

Why does kaizen work | काइजन क्यों कारगर होता है?

परिवर्तन मुश्किल है। यह डरावना होता है। इस मानव तथ्य से नहीं बचा जा सकता, चाहे परिवर्तन महत्वहीन हो या जीवन बदलने वाला हो। परिवर्तन के इस डर की जड़ मस्तिष्क के मनोविज्ञान में होती है। और जब डर बागडोर संभाल लेता है, तो यह सृजनात्मक, परिवर्तन और सफलता को रोक सकता है।

सभी परिवर्तन, यहां तक कि सकारात्मक परिवर्तन भी डरावने होते हैं। उग्र सुधारवादी या क्रांतिकारी साधनों से लक्ष्य तक पहुंचने के सारे प्रयास अक्सर इसलिए नाकाम हो जाते हैं, क्योंकि ये डर को बढ़ा देते हैं। लेकिन काइजन के छोटे कदम मस्तिष्क के डर को निहत्था कर देते हैं। तथा तार्किक विचार और सृजनात्मक खेल को प्रेरित करते हैं।

विकासवादी दृष्टिकोण से देखें, तो मस्तिष्क, मानव शरीर के सबसे असाधारण अंगों में से एक है। हृदय, लिवर और आँतें आदि हमारे अन्य अंग इतनी अच्छी तरह विकसित हुए हैं कि मानव विकास के युगों – युगों में भी उनमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

रॉबर्ट माउरर के अनुसार –

पिछले चार – पांच सौ मिलियन वर्षों से मस्तिष्क निरंतर विकसित होता रहा है। आज हमारे पास दरअसल तीन अलग – अलग मस्तिष्क हैं, जो एक – दो सौ मिलियन वर्षों के अंतराल से आए हैं। इंसान के रूप में हमारी एक चुनौती इन अलग- अलग मश्तिष्कों के बीच तालमेल बैठाना है, ताकि शारीरिक और भावनात्मक व्याधि से बचा जा सके।

मस्तिष्क के निचले हिस्से में मस्तिष्क नलिका है। यह लगभग पांच सौ मिलियन वर्ष पुरानी है और इसे रेप्टिलियन ब्रेन कहा जाता है। रेप्टिलियन या सरीसृप मस्तिष्क आपको सुबह जगाता है। रात को सोने भेजता है और आपके दिल को धड़कने की याद दिलाता है।

मस्तिष्क नलिका के ऊपर बैठा है मध्य – मस्तिष्क, जिसे मैमेलियन ब्रेन भी कहा जाता है। लगभग तीन सौ मिलियन वर्ष पुराना यह मस्तिष्क किसी न किसी रूप में हर स्तनपायी में होता है। मध्य मस्तिष्क शरीर के आंतरिक तापमान को नियमित करता है। यह हमारी भावनाओं का संचय करता है। और लड़ो या भागो प्रतिक्रिया को शासित करता है, जो खतरा सामने आने पर हमें जीवित रखती है।

कॉर्टेक्स या मस्तिष्क आवरण, मस्तिष्क का तीसरा हिस्सा है जो सौ मिलियन वर्ष पहले विकसित हुआ। कॉर्टेक्स बाकी मस्तिष्क के चारों ओर लिपटा होता है और यही इंसान होने के चमत्कार के लिए जिम्मेदार है।

कला, विज्ञान, संगीत और सभ्यता सबका वास यहीं होता है। यहीं हमारे तार्किक विचार और सृजनात्मक आवेग जन्म लेते हैं। जब हम कोई परिवर्तन करना चाहते हैं या सृजनात्मक प्रक्रिया को शुरू करना चाहते हैं, तो हमें कोर्टेक्स तक पहुंचने की जरूरत होती है।

जब आप परिवर्तन करना चाहते हैं लेकिन इस राह में आपको बाधा महसूस होती है। इसके लिए आप मध्य मस्तिष्क को दोष दे सकते हैं। यह लड़ो या भागो प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है। यह शरीर को सीधे कर्म के लिए उत्प्रेरित करता है।

How small steps turn into giant leaps | छोटे कदम कैसे विशाल छलांगों में बदल जाते हैं।

आपके मस्तिष्क की प्रोग्रामिंग परिवर्तन का प्रतिरोध करने के लिए की गई है। मगर छोटे कदम उठाकर आप प्रभावी ढंग से अपने नर्वस सिस्टम को दोबारा तैयार करते हैं। जिससे कि यह निम्नलिखित कार्यों को करे :

  • आपको सृजनात्मक अवरोध से बाहर निकलता है।
  • लड़ो या भागो प्रतिक्रिया को पार कर लेता है।
  • न्यूरॉन्स के बीच नई कड़ियां बनाता है, जिससे मस्तिष्क उत्साह से परिवर्तन की प्रक्रिया की कमान संभाल लेता है। इस प्रकार आप अपने लक्ष्य की ओर तेजी से प्रगति करते हैं।

बड़ा लक्ष्य > डर > कॉर्टेक्स तक सीमित पहुंच > असफलता

छोटा लक्ष्य > डर नहीं > कॉर्टेक्स संलग्न > सफलता

Anxiety, stress…or fear | चिंता, तनाव…या डर।

सबसे सफल लोग वो होते हैं जो डर को बिना पलक झपकाए देखते हैं। चिंता, तनाव या डर जैसी शब्दावली पर विश्वास करने के बजाय वे अपनी जिम्मेदारी को लेकर डरने की बात खुलकर कबूलते हैं।

“सारे साहसिक अभियान, खास तौर पर नए क्षेत्र में, डरावने होते हैं।”

— सैली राइड (अंतरिक्ष यात्री)

“डर किसी भी सृजनात्मक काम में एक महत्त्वपूर्ण घटक होता है।”

— चक जोन्स

इसे भी पढ़ें : How to manage stress | तनाव प्रबंधन कैसे करें?

अगर आपकी अपेक्षा यह है – कि अच्छी तरह चलने वाला जीवन हमेशा सुव्यवस्थित होगा तो आप खुद को पराजय के लिए तैयार कर रहे हैं। यदि आप मानते हैं कि किसी नौकरी या स्वास्थ्य का लक्ष्य आसान हो, तो आप डर उत्पन्न होने पर दुविधापूर्ण महसूस करेंगे।

हम किसी चीज की जितनी ज्यादा परवाह करते हैं, उतने ज्यादा सपने देखते हैं, उतना ही ज्यादा डर लगता है। डर के बारे में इस तरह से सोचने से हम कम परेशान महसूस करेंगे।

“साहस डर का प्रतिरोध है, डर पर विजय है लेकिन यह डर का अभाव नहीं है।”

— मार्क ट्वेन

मुश्किल समय में डर सामान्य और महत्त्वाकांक्षा का सामान्य संकेत है। यह समझने से हमारे आशा और आशावाद को पकड़े रखने की ज्यादा संभावना रहती है।

Practicing short questions : Kaizen technique | छोटे प्रश्नों का अभ्यास करना : काइजन तकनीक।

यदि आप काइजन को अपनाना चाहते हैं तो खुद से एक सवाल पूछें। क्या आप अपने जीवन में परिवर्तन लाना चाहते हैं? जब आपका अंतर्मन यह स्वीकार कर ले कि आप यह चाहते हैं तो खुद से यह संकल्प करें। कि आप जो भी करेंगे उसे सच्चे मन से करेंगे।

जब आप इसकी शुरुआत करते हैं तो यह जान लें कि आप अपने मस्तिष्क की दुबारा प्रोग्रामिंग कर रहे हैं। व्यवसाय में यह एक स्वयं सिद्ध सामान्य सत्य है कि कॉरपोरेशन को कभी भी आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। बल्कि हमेशा बेहतर बनने के तरीके खोजते रहना चाहिए।

माना आप आमतौर पर अपने जीवन से संतुष्ट हैं लेकिन उत्कृष्टता की संभावनाओं के प्रति सतर्क बने रहना चाहते हैं तो आप खुद से यह सवाल पूछ सकते हैं। वह कौन सा एक छोटा सा कदम है जो मैं अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उठा सकता हूं। यह सवाल इतना खुला हुआ है जिससे आपके मस्तिष्क को खेलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

यह सवाल उन सभी लोगों के लिए है जो किसी व्यक्ति के साथ संघर्षरत हो। चाहे वो बॉस हो, कर्मचारी या पड़ोसी, जो इस समस्या से निजात पाना चाहता है। हर दिन खुद से पूछें : इस व्यक्ति में कौन सी एक चीज अच्छी है? आप जल्दी पाएंगे कि आपको उसकी शक्तियां भी उतनी स्पष्टता से दिखने लगी हैं जितनी स्पष्टता से उसकी कमजोरियां दिख रही थीं।

यदि आप में निराशावादी और नकारात्मक महसूस करने की प्रवृत्ति है तो खुद से यह सवाल पूछें : वह कौन सी एक चीज है जो मेरे और मेरे संगठन या जीवनसाथी के बारे में खास है? जब आप यह सवाल खुद से बार – बार पूछते रहेंगे तो आप अपने मस्तिष्क की प्रोग्रामिंग यह देखने के लिए कर लेंगे कि क्या सही और अच्छा है।

Think small thoughts | छोटे विचार सोचें।

यह माइंड स्कल्पचर की विधि है। और यह मुश्किल रेस दौड़ने, ब्लाइंड डेट पर जाने या कर्मचारियों से ज्यादा प्रभावी ढंग से बात करने में आपकी मदद कर सकती है।

माइंड स्कल्पचर में नवीनतम न्यूरोसाइंस का लाभ मिलता है। यह हमें सुझाता है कि मस्तिष्क बड़ी नाटकीय खुराकों (बस इसे कर दो!) से सबसे अच्छी तरह नहीं सीखता है। यह तो बहुत छोटी क्रमिक वृद्धियों में सीखता है। इतनी छोटी कि पहले कभी इसे संभव ही नहीं माना गया हो।

Mind sculpture : a complete experience | माइंड स्कल्पचर : एक पूर्ण अनुभव।

इयान रॉबर्टसन द्वारा विकसित माइंड स्कल्पचर एक नई तकनीक है जो पूर्ण लेकिन स्थिर-चित्र एंद्रिक संलग्नता को समाहित करती है। इसके अभ्यासियों को यह नाटक करना होता है कि वे सचमुच उस कार्य को कर रहे हैं।

वे सिर्फ देखते ही नहीं बल्कि सुनते, सूंघते, स्वाद लेते और स्पर्श भी करते हैं। माइंड स्कल्पचर में लोग अपनी मांसपेशियों की गतिविधि और अपनी भावनाओं के उतार – चढ़ाव की कल्पना करते हैं।

बेहतरीन ओलंपिक तैराक माइकल फेल्प्स एक प्रभावी माइंड स्कल्पचर का उदाहरण है। फेल्प्स ने कुल 22 पदक जीते हैं, जिनमें से 18 स्वर्ण पदक हैं। बीजिंग में 2008 ओलंपिक की बात है। फेल्प्स के कोच ने प्रशिक्षण दिनचर्या के दौरान उनसे बिस्तर पर लेटकर माइंड स्कल्पचर का अभ्यास करने को कहा। फेल्प्स ने कल्पना की, कि वे सचमुच एक्वेटिक सेंटर के भीतर थे और प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा ले रहे थे।

आप भी इस वक्त ऐसी ही किसी चीज की कल्पना कर सकते हैं। बस यह कल्पना करें कि आपके पैर शुरुआती स्थान पर हैं, स्विमकैप आपके सिर पर अच्छे से लगी है और ऑडियंस शोर मचा रहे हैं। फेल्प्स ने मानसिक रूप से हर दिन रिहर्सल की, इसके बाद ही वे सचमुच पूल में उतरे। उन्होंने इस प्रकार बीजिंग ओलंपिक में आठ स्वर्ण पदक हासिल किए।

मानसिक पुनरुद्धार पर विश्व के अग्रणी विशेषज्ञ इयान रॉबर्टसन ने अपनी पुस्तक माइंड स्कल्पचर में जो लिखा था। वह ये है कि मस्तिष्क को यह पता ही नहीं चलता कि वह इस काल्पनिक गतिविधि को सचमुच नहीं कर रहा है। उसे तो लगता है कि वह इसे सचमुच कर रहा है। फेल्प्स के मस्तिष्क ने उसकी मांसपेशियों को सटीक संदेश भेजे, जो उन्हें ओलंपिक इतिहास में आगे बढ़ने के लिए जरूरी थे।

आप छोटी क्रमिक वृद्धियों द्वारा अपने मस्तिष्क को प्रशिक्षित कर सकते हैं, ताकि यह उन नई योग्यताओं को विकसित करले।

Do small tasks | छोटे कार्य करें।

छोटे कार्यों में बहुत कम समय या पैसा लगता है। ये हम में से उन लोगों के लिए भी रुचकर होते हैं जिनके पास इच्छाशक्ति का भंडार नहीं है। छोटे कार्य मस्तिष्क को चालाकी से सोचने पर मजबूर करते हैं। डर की प्रतिक्रिया के साथ चालाकी करके, छोटे कार्य मस्तिष्क को नई, स्थाई आदतें डालने की अनुमति देते हैं।

Kaizen is for your life only | काइजन आपके जीवन के लिए ही है।

यदि आप अपने जीवन में परिवर्तन लाना चाहते हैं। और सोचते हैं कि मेरे पास तो पैसा नहीं है और न बिलकुल भी समय है। तो कृपया धीरज रखें क्योंकि जीवन में सर्वश्रेष्ठ चीजों की तरह ही छोटे कदम भी मुफ्त हैं। चूंकि ये आपका केवल एक या दो मिनट ही लेते हैं इसलिए वे आपकी बेहद व्यस्त दिनचर्या में भी फिट हो सकते हैं।

कैसे छोटे काइजन कार्यों ने एक मेडिकल क्लीनिक को वित्तीय तबाही से बचाया?

एक क्लीनिक जो बहुत गंभीर मुश्किलों में था, जिसके रोगी उस क्लीनिक को छोड़कर दूसरे क्लीनिक पर जाने लगे थे। जो मरीज यहां रुकते भी थे वो बहुत खराब रेटिंग देते थे। जब लिखित सर्वे में रोगियों से पूछा गया तो उनकी मुख्य शिकायत थी क्लीनिक पर लंबा इंतजार।

इस बात से तो आप सब अवगत होंगे कि डॉक्टरों के क्लीनिक में लंबा इंतजार एक आम समस्या है। इस समस्या को सुलझाना आम तौर पर असंभव है क्योंकि हर दिन आपातकालीन स्थितियां सामने आती रहती हैं। जैसे कोई गंभीर मरीज जिसको एक साथ कई बीमारियां हैं जिसकी जांच करने में अधिक समय लग जाता है। जिसके कारण बाकी दिन की योजना गड़बड़ा जाती है।

इस समस्या को दूर करने के लिए जब क्लीनिक के स्टॉफ और मरीजों से पूछा और एक निर्णय लिया गया :

  • रिसेप्शनिस्ट व्यक्तिगत रूप से कारण बताएगी कि रोगी को इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।
  • रोगी से किसी दूसरे चिकित्सक से इलाज कराने या नया अपॉइंटमेंट देने का प्रस्ताव रखा जायेगा।
  • परीक्षण कक्ष में जाने से पहले इंतजार करने वाले हर रोगी से नर्स या नर्सिंग असिस्टेंट क्षमा मांगेंगे।
  • परीक्षण कक्ष में जाने से पहले डॉक्टर क्षमायाचना करेगा तथा जाने से पहले डॉक्टर रोगी को धन्यवाद करेगा कि उसने उनका क्लीनिक चुना।
  • अंत में जब मरीज दरवाजे से बाहर जायेगा तो रिसेप्शनिस्ट उन्हें धन्यवाद देगी।

ये परिवर्तन छोटे वाक्यों के थे — मुख्यतः “मैं क्षमा मांगता हूं” और “आपका धन्यवाद।” जब स्टॉफ ने इन परिवर्तनों को लागू किया तो मरीजों के सर्वे ने दिखाया कि संतुष्टि दर दोगुनी हो गई थी। और क्लीनिक को छोड़कर दूसरी जगह जाने वाले रोगियों की संख्या 60% तक कम हो गई थी।

How kaizen overcomes resistance | कैसे काइजन प्रतिरोध को मिटाता है?

एक महिला जो व्यायाम करना चाहती थी जिसने अपने घर के लिए एक महंगी ट्रेडमिल भी खरीदी थी। वह सोचती थी कि मैं इसे नहीं कर सकती। फिर वह काइजन की ओर मुड़ी। पहले महीने वह ट्रेडमिल पर खड़े होकर अखबार पढ़ती और कॉफी पीती थी। अगले महीने कॉफी खत्म करने के बाद वह ट्रेडमिल पर एक मिनट तक चलती थी।

हर सप्ताह वह एक मिनट बढ़ाती जाती। इन शुरुआती दिनों में उसके ये छोटे कार्य अधिकतर लोगों को मूर्खतापूर्ण लगते थे लेकिन वे कतई मूर्खतापूर्ण नहीं थे। वह व्यायाम के लिए सहनशक्ति विकसित कर रही थी। जल्द ही उसके “मूर्खतापूर्ण” छोटे कार्य बड़े हो गए और प्रतिदिन एक मील दौड़ने की दृढ़ आदत में बदल गए।


⇒ क्या धीमा परिवर्तन उससे बेहतर नहीं है, जो पहले था…यानी कोई परिवर्तन नहीं। इस रणनीति का एक रोचक उदाहरण इंग्लैंड में पली–बढ़ी एक महिला का है। तेरह साल की उम्र में उसे अहसास हुआ कि वह अपनी दैनिक चाय में जो चार चम्मच शक्कर डाल रही थी। वह उसके शरीर को कोई फायदा नहीं पहुंचा रही थी।

इच्छाशक्ति और आत्म–नियंत्रण की बदौलत वह चार में से तीन चम्मच कटौती करने में सफल रही। शक्कर की आखिरी चम्मच इस्तेमाल करने की आदत बड़ी ही जिद्दी थी। जब उसे अहसास हुआ कि उसकी इच्छाशक्ति आखिरी चम्मच का प्रतिरोध करने लायक नहीं है, तो उसने चम्मच को पकड़ा और चाय में डालने से पहले उसमें से शक्कर का एक दाना निकाल दिया।

अगले दिन दो और हर दिन एक दो ज्यादा दाने हटाती रही। चम्मच को खाली करने में लगभग उसे एक साल लग गया। 45 साल की उम्र में उसने यह बताया और तब भी वह अपनी चाय बिना शक्कर के ले रही थी।

New year’s resolutions in Kaizen style | काइजन शैली में नववर्ष के संकल्प।

यहां पर कुछ सबसे लोकप्रिय संकल्प हैं, जो आपको सफलता की राह पर ले जा सकते हैं। छोटे लेकिन महत्त्वपूर्ण kaizen कदमों के साथ आप अपने सपनों को पंख लगा सकते हैं।

संकल्प लें :

  1. ज्यादा स्वस्थ खाना।
  2. व्यायाम करना।
  3. पैसे बचाना।
  4. ज्यादा लोगों से मिलना।
  5. तनख्वाह बढ़ाने की मांग करें।
  6. ज्यादा उत्पादकता से अपने समय का उपयोग करें।

Kaizen technique | काइजन तकनीक

What will be your first small step | आपका पहला छोटा कदम क्या होगा ?

अधिकतर लोग पहलेपहल इस प्रकार की बात करते हैं “वजन कम करना,” या “ज्यादा व्यायाम करना।” यह एक अच्छी शुरुआत है लेकिन वजन कम करना या व्यायाम करना दरअसल छोटा कदम नहीं है। वास्तव में हम में से ज्यादातर इन लक्ष्यों की दिशा में नवाचार को लागू करने की कोशिश करते हैं। जैसे दौड़ने की दैनिक दिनचर्या को शुरू करना, डाइटिंग करना — और असफल होना।

आइए, एक सचमुच छोटा, साधारण दिखने वाला कदम खोजने की कोशिश करें। खुद से पूछें या किसी मित्र को कहें कि वो आपसे पूछे। आपकी सेहत की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए वो कौन सा पहला कदम है जो आप उठा सकते हैं।

इसके जवाब में आप कहेंगे “कम खाना।” लेकिन यह अस्पष्ट लक्ष्य है। दोबारा कोशिश करें, फिर से पूछें। आपका जवाब कम चॉकलेट खाना या चॉकलेट से बचना हो सकता है लेकिन ये आदर्श उत्तर नहीं है। गौर करें, इस सवाल को बार–बार सुनकर आपका मस्तिष्क इसे ग्रहण करना शुरू कर रहा है। वह इसे उलट–पलट रहा है और ज्यादा सृजनात्मक उत्तर दे रहा है।

फिर से कोशिश करें! वह कौन सा छोटा कदम है जो आप अपनी सेहत की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए उठा सकते हैं।

आपका आदर्श जवाब है : चॉकलेट खाएं, लेकिन पहला कौर बाहर फेंक दें। यह आहार नियंत्रण सीखने का बेहतरीन तरीका है। आपकी आंखे पूरी चॉकलेट देख रही हैं लेकिन आपका मस्तिष्क खाने से पहले इसका कुछ हिस्सा हटाना सीख रहा है।

आपका पहला कदम सचमुच छोटा है। यह ध्यान में रखकर आप खुद को सफलता की सर्वश्रेष्ठ संभावना देते हैं। एक बार जब आप पहला कदम उठाने की खुशी अनुभव कर लेते हैं तो फिर उचित निर्णय ले सकते हैं। क्या दूसरा और अगला कदम उठाना सही है। यदि आपका मस्तिष्क इस असमंजस में है तो आपको कदम छोटा करने की जरूरत है।

Give small prizes | छोटे पुरस्कार दें।

छोटे पुरस्कार केवल किसी को काम पूरा करने का प्रोत्साहन देने के लिए ही पर्याप्त नहीं होते — बल्कि वे सर्वश्रेष्ठ भी होते हैं। यह सच है, चाहे पुरस्कार को पूरी कंपनी में होने वाली पहल का हिस्सा बनाया जाए या आपके व्यक्तिगत जीवन का।

सबसे अच्छे संसार में ऑटोमोबाइल असेंबली लाइन पर ताईची ओह्नो की लटकती रस्सी जैसे उपयोगी सुझाव की प्रोग्रामिंग की जाती है। वे कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे ऐसी समस्याओं को देखें और बताएं जो जमीन से ही दिख सकती हैं।

जापान में कर्मचारी सुझाव कार्यक्रम एक व्यापक रूप से लोकप्रिय Kaizen तकनीक है। इसमें लगभग तीन चौथाई कर्मचारी प्रतिक्रिया करते हैं, लेकिन अमेरिका में इन सुझाव कार्यक्रमों में सहभागिता की दर बहुत निराशाजनक होती है। जापान में कर्मचारियों के 90% विचारों को अपनाया जाता है लेकिन अमेरिकी कंपनियां केवल 38% को ही अपनाती हैं।

आंतरिक प्रोत्साहन :

अमेरिकी और जापानी सुझाव कार्यक्रमों में जो मुख्य फर्क है, वह है सहभागी कर्मचारियों को दिए जाने वाले पुरस्कारों का आकार। अमेरिका में कर्मचारियों को उसी अनुपात में बड़े नगद पुरस्कार दिए जाते हैं जिस अनुपात में उनका सुझाव कंपनी के पैसे बचाता है। लेकिन जापान में औसत पुरस्कार 3.88 डॉलर का होता है जबकि अमेरिका में औसतन $ 458 का होता है।

छोटे पुरस्कार आदर्श प्रोत्साहन देते हैं चाहे आप बेहतर आदत डालने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना चाहते हैं या दूसरों को। न सिर्फ वे सस्ते और सुविधाजनक होते हैं बल्कि वे स्थाई परिवर्तन के लिए आवश्यक आंतरिक प्रेरणा को भी उत्पन्न कर देते हैं।

Kaizen technique | काइजन तकनीक।

Recognizing the small moments | छोटे पलों को पहचानना।

जीवन में काइजन नीति अपनाने के लिए ज्यादा धीमी गति और छोटे पलों की कद्र की जरूरत होती है। छोटे पलों पर ध्यान देना आसान लग सकता है लेकिन इसमें सम्मान, कल्पना और उत्सुकता की जरूरत होती है। यहां केवल कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं कि किस तरह छोटे पलों ने व्यवसाय में उत्कृष्टता को जन्म दिया है।

  • जॉर्ज डी मेस्ट्रल नामक एक स्विस इंजीनियर अपने कुत्ते को घुमा रहा था, तभी उसने गौर किया कि कुत्ते के बालों में और उसके कपड़ों में कंटीले बीजकोष चिपके हुए थे। मेस्ट्रल ने इन छोटे हठीले बीजकोषों से चिढ़ने के बजाय उनमें जिज्ञासा दिखाई। इस रोजमर्रा के पल पर ध्यान देने की वजह से आगे चलकर उन्होंने वेल्क्रो का अविष्कार कर दिया।
  • अविष्कारक एडविन लैंड अपने परिवार के साथ वेकेशन पर गए हुए थे। वहां उन्होंने अपनी तीन साल की बेटी की तस्वीर ली। वह उसी समय तस्वीर देखना चाहते थे। उसकी अधीरता को नजरंदाज करने की बजाय लैंड ने एक संभावना को देखा। पांच साल बाद प्रथम इंस्टैंट कैमरा का अविष्कार हो गया।

जब आप परिवर्तन की योजना को लागू करते हैं तो खुद को बोर तथा बेचैन महसूस न करें, बल्कि आनंद के छुपे हुए पलों की तलाश करें। जो लोग अपने स्वास्थ्य की आदतों को सुधारने में सबसे ज्यादा सफल होते हैं, वे व्यायाम और अच्छे भोजन को रोमांच के स्रोत में रूपांतरित कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें : मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के 7 सूत्र।

Kaizen technique | काइजन तकनीक

Developing awareness of the small moments | छोटे पलों की जागरूकता विकसित करना।

छोटे पलों की संभावना को देखने के लिए जिज्ञासा और खुले दिमाग की जरूरत होती है। जब भी वह आपके मार्ग में प्रकट हों। आप इन गुणों को विकसित करके सृजनात्मक क्षमता को पहचानने के अवसर बेहतर बना सकते हैं।

Relationship : series of short moments | संबंध : छोटे पलों की श्रृंखला।

काइजन मजबूत संबंधों की बुनियाद प्रदान करता है। पल दर पल हम एक दूसरे को खोजते हैं और विश्वास बनाते हैं। छोटे पल सतत ध्यान और पोषण देने का काम करते हैं।

“आप जहां भी हैं, वहां थोड़ी नेकी कर दें; यह नेकी के छोटे टुकड़े होते हैं, जो मिलकर संसार को अभिभूत कर देते हैं।”

— डेजमंड टूटू

छोटे पलों पर ध्यान केंद्रित करना आसान भी है और मुश्किल भी। मुझे यह तब बहुत आसान लगता है जब मैं बच्चों को खेलते हुए और सीखते देखता हूं। कैसे वे उस पल का आनंद लेते हैं।

जब उनके मस्तिष्क विकसित होते हैं तो दो अन्य छमता आ जाती हैं। एक तो अतीत को याद करने की क्षमता है और दूसरी भविष्य का अनुमान लगाने की योग्यता है। ये दोनों ही क्षमताएं प्रजाति के रूप में हमारे बचाव की औजारपेटी के लिए अनिवार्य होती हैं।

काइजन टिप

हममें से ज्यादातर लोग अतीत में रहने या भविष्य का अनुमान लगाने में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। जिससे कि उस वक्त के छोटे पलों को भूल जाते हैं। जब भी आप खुद को चिंता या अफसोस में डूबा पाएं, तो इसे आजमाएं :

  1. खुद से पूछें : क्या अपनी इस चिंता के आधार पर मुझे कोई चीज बदलने की जरूरत है?
  2. यदि जवाब हां है, तो उस परिवर्तन की दिशा में कदम उठा लें। और यदि जवाब नहीं है (जो अक्सर होता है) तो अपने आस पास कोई ऐसी वस्तु या व्यक्ति को खोजें, जो आपको खुशी का सबसे प्रबल अहसास देता हो। उस पर तीस सेकंड तक अपने विचार केंद्रित करें। यह प्रक्रिया आपके मस्तिष्क को वर्तमान पल में जीने का प्रशिक्षण देती है।

उम्मीद है आपको काइजन तकनीक के बारे में जानकारी अच्छी लगी होगी। जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों को भी शेयर करें। विस्तृत जानकारी के लिए one small step can change your life the kaizen way किताब पढ़ें।

—🙏 धन्यवाद 🙏—

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