How to mentally strong | मानसिक रूप से मजबूत कैसे हों?

How to mentally strong | मानसिक रूप से मजबूत कैसे हों?

How to mentally strong | मानसिक रूप से मजबूत कैसे हों?

क्या आपको छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है? या फिर एक बार की हार के बाद दिल टूट जाता है। कुछ नया करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं कि कहीं फिर से असफल न हो जाएं? यदि ऐसा आपके साथ हो रहा है या फिर इस तरह के विचार आपके मन में आते हैं तो आपको मेंटली स्ट्रॉन्ग बनने की जरूरत है। आज हम, How to mentally strong | मानसिक रूप से मजबूत कैसे हों?, टॉपिक के बारे जानेंगे।

Mentally strong होने का ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि इंसान अपनी फीलिंग्स छुपाए। बल्कि जो इंसान mentally strong होता है वह अपनी फीलिंग्स कंट्रोल में रखता है। यदि आप अपने विचार और भावनाओं को नियंत्रण में करना सीख गये तो आप जिंदगी में उचित निर्णय लोगे। और ये आपके कैरियर के लिए एक अच्छा कदम होगा। 

जिस प्रकार से शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए व्यायाम की जरूरत होती है। ठीक उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सकता है और आप mentally strong बन सकते हैं। कैसे आप मानसिक रूप से मजबूत बन सकते हैं? इसके लिए नीचे कुछ दिशा निर्देश दिए गए हैं। आप इन्हे  फॉलो करके खुद को mentally strong बना सकते हैं।

1. गलतियां करने से न डरें | Don’t be afraid to make mistakes.

जब भी आपके मन में कोई विचार आता है और आपको लगता है कि इस पर काम करना चाहिए। लेकिन आप अंदर से हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपसे कुछ गलत हो जायेगा। या कुछ नया करने से हमेशा डरते रहते हैं। तो दोस्तो जिंदगी में आपके चारों ओर जितने भी संसाधन हैं वो सब किसी की गलतियों के ही परिणाम हैं। यदि वो लोग कोई नई गलती न करते और उनसे कुछ न सीखते तो क्या ये चीजें आज आपके चारों ओर विद्यमान होती?

गलती करने का ये मतलब भी नहीं है कि आप एक के बाद एक नई गलती करते जाएं। हर बार की हुई गलती से कुछ नया सीखें और उसे अपने क्रिएटिव थॉट्स के साथ मिलाकर कुछ नया करने की कोशिश करें। और जिन गलतियों को आपसे पहले जो लोग कर चुके हैं उन्हीं गलतियों को दुबारा न दोहराएं। ऐसा करके आप अपना कीमती समय बर्बाद करने के बजाय उनकी गलतियों से कुछ नया सीखें। आप जरा सोचिए यदि एडिसन गलती करने से डरते रहते तो क्या आज हम इलेक्ट्रिक बल्ब का इस्तेमाल कर पाते। और ऐसे हजारों व लाखों उदाहरण हैं।

2. हमेशा खुद के बेहतर वर्जन की तलाश करें | Always lookup for a better version of yourself.

क्या आप अपनी लाइफ की दूसरों के साथ तुलना करते हैं और उनकी सफलता से जलते हैं। अगर ऐसा है तो ये आदत अच्छी नहीं है। याद रखें जितना कम ध्यान आप दूसरे लोगों की सक्सेस पर दोगे उतना अधिक समय आपके लक्ष्य को हासिल करने के लिए बचेगा। इसलिए दूसरों से कंपेयर करने के बजाय खुद से कंपटीशन करो। आप जो कल थे उसका बेहतर वर्जन बनकर आज दिखाओ। 

सत्य तो यह है कि इस दुनिया में परफेक्ट तो कोई भी नहीं है। जो क्वालिटी आप के अंदर है, हो सकता है वो दूसरे लोगों के पास न हो। यदि आपको खुद में कमी दिखती है तो खुद को इंप्रूव करो। किसी भी चीज के दो पहलू होते हैं। एक पॉजिटिव और दूसरा नेगेटिव। जब आप नेगेटिव सोचने लगते हो तो आपके साथ नेगेटिव रिजल्ट्स आने लगते हैं। इसलिए आप किसी भी चीज में पॉजिटिव व्यू से ही देखें। 

एक्टिव रहें और खुद को थोड़ा व्यस्त रखें। “खाली दिमाग शैतान का घर होता है” ये तो आपने सुना ही होगा। सुबह जल्दी उठें, वॉक पर जाएं। यदि मन न हो तब भी कोशिश करें। अपने अंदर अच्छी आदतें बिल्ड करें। आप चाहें तो किताब पढ़ सकते हैं जो कि बहुत ही अच्छी आदतों में से एक है। आप जितना busy रहेंगे उतना ही आपको नेगेटिव सोचने का कम समय मिलेगा। आप अपना नजरिया बदलें, आपको ये दुनिया बदली नजर आएगी।

How to mentally strong | मानसिक रूप से मजबूत कैसे हों?

3. बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना अधिक दें | Give more without expecting anything in return.

बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना दूसरों को देना सीखें। अक्सर देखा जाता है, जब भी कोई किसी को कुछ भी देता है तो उसके पीछे उसका स्वार्थ छुपा रहता है। देने वाले के मन में ये भावना जरूर आती है कि इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा? ये कोई नई बात नहीं है अपितु यह तो अधिकतर लोगों के साथ होता है।

देने के बारे में जाने माने साइकोलॉजिस्ट प्रोफेसर एडम ग्रांट ने अपनी किताब “गिव एंड टेक” में विस्तार से वर्णन किया है। उनके अनुसार आम जिंदगी में तीन तरह के लोग होते हैं। एक गिवर, जो सिर्फ निस्वार्थ देने की भावना से प्रेरित होकर देता है। ये लोग दूसरे लोगों की बहुत परवाह करते हैं। दूसरा टेकर, जो सिर्फ दूसरों से लेने में विश्वास करते हैं। इनका मानना है कि यदि जीवन में सफल होना है तो पहले अपनी जरूरतों को पूरा करो। तीसरे हैं मैचर्स, जो गिवर और टेकर के बीच बैलेंस बनाकर चलते हैं। इनका मानना है कि कुछ पाने के लिए कुछ न कुछ तो देना पड़ेगा। इसलिए जब भी इस प्रकार के लोग आपकी कोई मदद करते हैं तो बदले में उन्हें भी भलाई की उम्मीद होती है। 

हमेशा उन लोगों को दें जिन्हें वास्तव में जरूरत है। और आपसे जितना बचता है या जितना आप छोड़ सकते हैं उतना ही दें। याद रखें आप गिवर बनकर न सिर्फ दूसरों की सहायता करते हैं बल्कि आप समाज में अपनी अच्छी रेपुटेशन भी बनाते हैं। जब आप दूसरों को देते हैं तो वह किसी न किसी रूप में आपके पास कई गुना वापस आता है।

4. कुछ चुनौतीपूर्ण बातचीत की अगुवाई करें | Lead some challenging conversations.

आपके वर्कप्लेस या कंपनी में ऐसा अमूमन देखने को मिलेगा। किसी सामाजिक अनुष्ठान में एक नेता कैसे बड़ी कुशलता से गंभीर मुद्दों पर चर्चा करते हैं। जब आपके सामने ऐसी परिस्थिति पैदा होती है तो आप कैसे इसे लीड करेंगे? संस्थानों और कंपनीज में ऐसा प्राय होता है लेकिन एक लीडर होने के नाते आपके क्या दायित्व होंगे? 

अधिकतर लोग ऐसे मौकों से बचना चाहते हैं। वो डरते हैं कि कहीं सच बोलने से और ज्यादा बात न बिगड़ जाए। आपको कैसे इस मुद्दे को हल करना है ये आपकी वाकपटुता और अनुकूल वातावरण पर निर्भर करता है। सबसे पहले आपको स्थिति को अच्छे से देखकर समझना है और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनना है। उसके बाद आप अपने विवेक से निर्णय लें और कुछ बुद्धिजीवियों की सलाह भी लें। 

अगर आपको लगता है कि यहां तुरंत निर्णय नहीं लिया जा सकता है तो ऐसा जरूर करें। इसके लिए कुछ देर का विराम लें, बाहर निकल कर थोड़ा टहलें और पानी पिएं। हिम्मत करके ऐसी बातचीत को सुलझाएं। कई बार परिणाम उग्र भी हो सकते हैं इसके लिए खुद का बचाव बेहद जरूरी है। इस प्रकार के चुनौतीपूर्ण कार्य आपके मानसिक रूप से मजबूत होने में मददगार साबित हो सकते हैं। 

5. आपको मदद की वास्तव में आवश्यकता हो इससे पहले मांगें | Ask for help before you really need it.

जब आपको अहसास होता है कि किसी काम को आप अकेले नहीं कर सकते तो मदद जरूर मांगें। सामाजिक प्राणी होने के नाते इंसान एक दूसरे पर निर्भर रहता है। सर्वाइव करने के लिए आपको दूसरों की सहायता लेनी पड़ेगी। जिस प्रकार शिक्षा के लिए स्कूल या संस्थान, इलाज कराने के लिए डॉक्टर्स और अच्छी बॉडी बनाने के लिए फिटनेस सेंटर जाते हैं। 

यदि आप मदद मांगने में संकोच करते हैं तो आप उन लोगों को भी मदद करने से रोक रहे हैं जो ऐसा करना चाहते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो दूसरों की सहायता करना चाहते हैं। इंसान के अंदर यह गुण प्राकृतिक रूप से समाहित होता है। यद्यपि लोग उनकी मदद करना पसंद करते हैं जो अपनी मदद के लिए कोशिश करते हैं।

आपको लोगों को दिखाना होगा कि आप कितने सक्षम हैं। जब तक आप खुद पैरवी नहीं करते तब तक आपके साथ कोई नहीं आएगा। लोग अक्सर यह सोच कर मदद नहीं मांगते कि उन्हें नकार दिया जायेगा। वे मदद मांगने में असहज महसूस करते हैं क्योंकि इसके लिए किसी और को नियंत्रण सौंपना होता है।

यदि आप एक टीम हैं तो आप इससे अकेले प्रभावित नहीं होते बल्कि सभी प्रभावित होंगे। अपनी टीम और खुद के विकास में अवरोधक न बनें। हो सकता है आप जिससे मदद मांगने जाते हैं वो इसमें सक्षम न हो। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि वो किसी ऐसे व्यक्ति को जानता हो जो वास्तव में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आपको आगे आना चाहिए।

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