How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर कैसे बढ़ाएं?

How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर कैसे बढ़ाएं

How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर को कैसे बढ़ाएं?

नमस्कार दोस्तो, आज हम इस लेख (How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर कैसे बढ़ाएं) के माध्यम से स्मरण शक्ति के बारे में बात करेंगे। आज ये दुनिया इतनी फास्ट हो गई है कि इंसान आपाधापी में जरूरी कामों को भी भूल जाता है।

जल्दी करने और मल्टीटास्किंग के चक्कर में वह बहुत सी छोटी – छोटी बातें भूल जाता है। ये छोटी बातें आगे चलकर बहुत बड़ा परिणाम घोषित कर सकती हैं जिन्हें आप अक्सर भूल जाते हैं। क्योंकि छोटे – छोटे कदम ही मंजिल की बुलंदियों तक पहुंचाते हैं।

What is memory | स्मृति क्या है?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, किसी सीखी हुई क्रिया के पुनर्वाहन (Recall) या दोहराने को स्मृति कहते हैं। अतः स्मृति (memory) की क्रिया सीखने के बाद धारण करने और फिर उसे दोहराने से संबंधित होती है।

Definition of memory | स्मृति की परिभाषा :

“जो बात पहले से की जा चुकी है उसे स्मरण करना ही स्मृति है।”

— वुडवर्थ

‘स्मृति’ मस्तिष्क का खजांची है।

— एक कहावत

“स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है।”

— स्काउट

‘स्मृति’ वह पुजारिन है, जो वर्तमान को समाप्त कर अपना हृदय मृतक भूत की मूर्ति पर अर्पित कर देती है।

— रवींद्र

“The true art of memory is the art of attention.”

— S. Johnson

स्मृति के अंतर्गत सीखना (Learning), धारण करना (Retention) और पुनर्वाहन करना ये तीनों ही आते हैं। अतः इन्हें  स्मृति के अंग भी कहा जाता है। स्मृति के ये अंग आपस में इतने घनिष्ठ होते हैं कि इन्हें अलग करना मुश्किल है।

Types of memory (स्मृति के प्रकार)

स्मृति को मुख्यतः दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है :-

1. Short-term memory (लघु-सत्र स्मृति)

मनोवैज्ञानिकों ने short-term memory का मुख्य कारण सामग्री को बहुत ही थोड़े समय तक सीखना माना है। यह स्मृति कुछ समय तक ही बनी रहती है। उदाहरण के तौर पर जब हमारा परिचय किसी अंजान व्यक्ति से कराया जाता है तो थोड़ी देर बाद ही हम उसका नाम भूल जाते हैं। हालांकि उसका चेहरा हमें जरूर याद रहता है।

2. Long-term memory (दीर्घ-सत्र स्मृति)

इस प्रकार की मैमोरी में व्यक्ति अधिक देर तक सीखता है। वह बार – बार चीजों का अभ्यास करता है जिससे उन सामग्रियों का अधिकतम भाग उसकी स्मृति में जमा हो जाता है। इस तरह व्यक्ति को दीर्घ – सत्र मैमोरी में चीजें लंबे समय तक याद रहती हैं।

स्मृति के घटक (factors of memory)

स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया (Mental process) है ये तो आप जान ही चुके हैं। यह कोई स्थाई चीज नहीं है। इसमें बदलाव होते रहते हैं। आगे हम स्मृति के उन अंगों के बारे में जानेंगे जो स्मृति के विकास में सहायक होते हैं। इन्हें मैमोरी के कारक या अंग भी कहा जाता है। स्मृति के निम्नलिखित चार अंग हैं :-

  1. सीखना (Learning)
  2. धारण (Retention)
  3. प्रत्यावाहन या पुनर्वाहन (Recall)
  4. पहचानना (Recognition)

1. सीखना (Learning)

सीखने के द्वारा ही स्मृति की समस्त क्रियाएं संपादित होती हैं। लर्निंग और मेमोरी में अभिन्न स्बंध है। कोई भी नई चीज देखकर हम पहले सीखते हैं, इसके बाद स्मरण करते हैं। सीखने के अभाव में  न तो स्मरण की क्रिया संभव हो पाती है और न ही संपादित हो पाती है। हम स्मरण उसी चीज का करते हैं जिसे हम पहले सीख चुके हैं।

2. धारण (Retention)

किसी भी विषय को केवल सीख लेने से स्मरण – क्रिया पूरी नहीं हो जाती। सीख लेने के बाद व्यक्ति के मस्तिष्क में अनुभूति का धारण करना जरूरी है। इसलिए धारण भी अनुभूति का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। धारण – क्रिया सीखने के तुरंत बाद शुरू हो जाती है और एक निश्चित समय तक चलती रहती है।

3. प्रत्यावाहन या पुनर्वाहन (Recall)

अब प्रश्न यह उठता है कि धारण – क्रिया किस प्रकार अपनी भूमिका अदा करती है। इस सवाल के जवाब में मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कोई सीखा हुआ विषय व्यक्ति के मस्तिष्क में स्मृति – चिन्ह के रूप में अंकित हो जाता है।

जब तक यह स्मृति चिन्ह व्यक्ति के मस्तिष्क में उपस्थित रहता है, व्यक्ति उस विषय का प्रत्यावाहन आसानी से कर पाता है। और जब यह स्मृति – चिन्ह मस्तिष्क से मिट जाता है तब व्यक्ति उसी विषय का प्रत्यावाहन करने में असमर्थ हो जाता है।

4. पहचानना (Recognition)

यह स्मृति का चौथा अंग है। पहचान से तात्पर्य उस विषय – वस्तु से है जिसे पूर्व में धारण किया गया है। अतः पहचान से तात्पर्य पुनः स्मरण में कोई गलती न करने से है। सामान्यतः पहचान तथा पुनः स्मरण की क्रियाएं साथ – साथ चलती हैं।

भूलना या विस्मृति (Forgetting)

स्मृति की क्रियाओं को समझने के लिए आपको विस्मृति की क्रियाओं के बारे में जानना बहुत जरूरी है। ये ठीक उसी प्रकार है जैसे दिन को समझने के लिए रात और ठंड को समझने के लिए गर्मी को जानना। असल में ये दोनों क्रियाएं एक – दूसरे की पूरक हैं।

विस्मृति या भूलने की गति तीन बातों पर निर्भर करती है —

  • व्यक्ति की योग्यता (Ability)

हर एक व्यक्ति की योग्यता असमान होती है। कुछ लोग अधिक योग्य होते हैं, वे किसी विषय की सामग्री को दूसरों की अपेक्षा कम भूलते हैं।

  • अभ्यास की मात्रा (Practice)

अभ्यास करने से कठिन से कठिन कार्य आसन हो जाते हैं। अभ्यास के ऊपर यहां एक प्रसिद्ध कहावत याद आ रही है—

“करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।

रसरी आवत जात ते सिल पर पड़त निशान।।”

अभ्यास में इतनी ताकत होती है जोकि एक रस्सी पत्थर को भी काट सकती है। आप जिस विषय पर जितना अधिक अभ्यास करते हैं उसे उतना ही धीरे – धीरे भूलेंगे। यानी उसे लंबे समय तक याद रखा जा सकता है।

  • सामग्री (Material)

अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री का प्रभाव हर जगह लंबे समय तक टिकता है। विस्मृति के साथ भी जिस प्रकार की सामग्री होती है, उसी प्रकार भूलने का प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार शारीरिक क्रियाएं , मानसिक क्रियाओं (Mental activity) की अपेक्षा धीरे – धीरे भूली जाती हैं।

How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर कैसे बढ़ाएं?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे कुछ नियम हैं जिनका पालन करके व्यक्ति कम मेहनत और कम समय में अधिक से अधिक चीजों को याद रख सकता है। मैमोरी पॉवर या स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं —

1. सीखने की प्रबल इच्छा (Strong desire to learn) :

किसी कार्य को आप अपनी इच्छा के विरुद्ध नहीं कर सकते हैं। बिना इच्छा के किसी कार्य को पूरा करना भी मुश्किल होता है। स्मरण शक्ति के लिए भी सीखने की प्रबल इच्छा बहुत जरूरी है। जब तक आप किसी चीज को याद करना जरूरी नहीं समझेंगे तब तक वह चीज आपको याद नहीं होगी।

यदि आपके अंदर किसी विषय को याद करने की प्रबल इच्छा होगी तो आप उसे जरूर याद कर पाएंगे। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सीखने की प्रबल इच्छा के कारण चीजें कम समय में सीखी जा सकती हैं। इसका दूसरा पहलू यह है कि ये सीखी हुई चीजें अधिक समय तक याद भी रहती हैं।

2. ध्यान दें (Pay attention) :

यदि आप खुद पर ध्यान रखेंगे तो किसी भी चीज को लंबे समय तक याद रखा जा सकता है। कई बार क्लास में या किसी की कही गई बात जब हमें याद नहीं रहती तो इसका मतलब सीधा है। आपका ध्यान उस जगह एकाग्र नहीं है।

उस समय आपका ध्यान कहीं और ही भटक रहा है। किसी भी विषय को सीखने के लिए ध्यान की एकाग्रता बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसलिए अच्छी स्मृति या स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए ध्यान को एकाग्र रखना बहुत आवश्यक है।

3. दृश्यों का अधिक प्रयोग (More visual concept) :

चीजों को याद रखने के लिए यह तरीका बहुत ही कारगर है। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो किसी भी विषय को सीखने के लिए दृश्यों या visualization का अधिक प्रयोग करना चाहिए। इस तरह से चीजें लंबे समय तक हमारी मेमोरी में बनी रहती हैं।

जब आप कोई मूवी या नाटक देखते हैं तो उसके पात्र या कहानी आपकी स्मृति में लंबे समय तक बने रहते हैं। जबकि आप बुक पढ़ते हैं तो ऐसा नहीं हो पाता है। चीजों को लंबे समय तक अपनी मैमोरी में बनाए रखने के लिए विजुअल कंसेप्ट अपनाएं।

किताब पढ़ते वक्त भी ऐसा अनुभव करें कि आप अपनी कोई पसंदीदा फिल्म देख रहे हैं। ऐसा करने से आपकी मेमोरी शार्प बन जायेगी।

4. अच्छी गुणवत्ता वाली नींद (Good quality sleep) :

आपके शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आराम की जरूरत होती है। यदि ऐसा नहीं होता है तो शरीर में थकान महसूस होने लगती है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 6 से 8 घंटे सोना चाहिए।

कुछ भी पढ़ने या सीखने के बाद आपके आराम या नींद लेने से वो आपकी स्मृति में स्थिर हो जाती है। इसलिए सोने से पहले कठिन चीजों को सीखना या याद कर लेना चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाली नींद आपकी स्मृति में सुधार करने में मदद करती है।

5. लिखना (Writing) :

हमारा मस्तिष्क शरीर के सभी बाकी अंगों में से विचित्र और महत्त्वपूर्ण है। एक तरह से यह हमारी बॉडी का कंट्रोल सेंटर है। डेली रूटीन में हमारे साथ जो भी घटित होता है वह सब हमारे मस्तिष्क की मैमोरी में स्टोर हो जाता है।

कुछ ऐसी घटनाएं भी होती हैं जिन्हें हम लंबे समय तक याद रख पाते हैं। अधिकतर चीजें कुछ समय बाद हमारी memory से डिलीट हो जाती हैं। लेखन क्रिया हमारी स्मृति को विकसित करने में सहायक होती है।

आप जो भी पढ़ते हैं उसे याद रखने के लिए notes के रूप में लिख लें। या फिर आप कोई ब्लॉग अथवा आर्टिकल लिखने की शुरुआत करें। इस प्रकार आप लिखी हुई चीजों को अपेक्षाकृत लंबे समय तक याद रख सकते हैं।

6. दोहराव (Repetition) :

आप किसी विषय को पढ़ लेते हैं और याद कर लेते हैं लेकिन कुछ समय बाद ये हमारी स्मृति से मिट जाती हैं। स्थायी रूप से याद करने के लिए उस विषय को बार – बार दोहराना अत्यंत आवश्यक है। आप जब भी किसी विषय को अच्छी तरह समझ के दोहराते हैं तो उसकी अमिट छाप हमारे मन में पड़ जाती है।

इस बात को आप इस तरह समझ सकते हैं कि जिस कच्चे रास्ते पर बहुत से लोग आवागमन करते हैं, वहां पगडंडी स्वतः बन जाती है। इसी प्रकार जब कोई बात हमारे मस्तिष्क तक पहुंचने का रास्ता बनाती है, तब हमारी स्मृति पर उसकी गहरी छाप पड़ जाती है।

7. योग और ध्यान (Yoga and meditation) :

किसी भी विषय को सीखने या याद करने के लिए मन का एकाग्र होना बहुत जरूरी है। यदि किसी काम को करते समय आपका मन नहीं लगता है। या कुछ याद करते समय आपका मन एकाग्र नहीं है तो आपको वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे। जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायाम जरूरी है ठीक उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान आवश्यक हैं।

“ध्यान से सफलता मिलती है।”

— वृन्दावनलाल वर्मा

“मस्तिष्क के लिए अध्ययन उतना ही जरूरी है, जितना शरीर के लिए व्यायाम।”

— जोसेफ एडीसन

मन को एकाग्र करने के लिए ध्यान क्रिया बहुत आवश्यक है। इससे मन शांत होता है और आपकी एकाग्रता शक्ति बढ़ती है। जब आप एकाग्र मन से कुछ भी पढ़ते हैं या सीखते हैं तो उस समय अच्छे परिणाम मिलते हैं। यानी आपकी स्मरण शक्ति (Memory power) तेज होने लगती है।

8. पौष्टिक व संतुलित खान – पान (Nutritious and balanced diet) :

जैसा कि आप सब को पता होगा कि व्यक्ति के खान – पान का सीधा असर उसकी यादाश्त पर पड़ता है। जिस व्यक्ति का खान – पान पौष्टिक और संतुलित होता है, उसकी स्मरण शक्ति (Memory power) भी तीव्र होती है।

पौष्टिक आहार हमारी मेमोरी को बढ़ाने के साथ – साथ दैनिक कार्यों को करने के लिए ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए हमें विटामिनयुक्त व खनिज से भरपूर आहार लेना चाहिए। हरी सब्जियां, ताजे फल और उनका जूस, सूखे मेवे, दूध, अंडा और बादाम आदि आपकी स्मरण शक्ति को बढ़ाते हैं।

9. मन को शांत व स्थिर रखें (Keep calm and steady) :

मानसिक तनाव, भयभीत अवस्था और घबराहट में यादाश्त कमजोर पड़ जाती है। आपका मन जितना शांत, स्थिर और प्रसन्न होगा, आपकी स्मरण शक्ति (Memory power) उतनी ही बेहतर होगी।

मन को एकाग्र करके सीखने या पढ़ने से चीजें जल्दी याद हो जाती हैं। इसलिए आप हमेशा शांत और मानसिक रूप से तैयार रहें। रोजाना के जरूरी कार्यों को अपनी डायरी में नोट कर लें।

10. अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग (Use of your imagination power) :

स्मरण शक्ति को बढ़ाने का यह एक बेहतरीन तरीका है। आपकी कल्पना शक्ति एक मूल्यवान पूंजी है, जो सृजन कार्य करती रहती है। कल्पना शक्ति के बल पर इस सृजनशीलता को श्रेष्ठता प्रदान की जाए तो आप आश्चर्यजनक परिणाम पाएंगे।

बस महत्त्वपूर्ण ये है कि आप अपनी imagination का उपयोग मन लगाकर करें। और एकाग्रचित्त होकर अपनी इस imagination power को अपने अध्ययन में लगा दें।

दोस्तो, स्मरण शक्ति (memory power) के बारे में हमने इस लेख में जानकारी दी है। आपको ये आर्टिकल, How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर कैसे बढ़ाएं? कैसा लगा? हमें आप कमेंट करके जरूर बताएं क्योंकि आपके कमेंट्स हमारे लिए एक नई सीख देते हैं। और यदि आपको ये लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

—🙏 धन्यवाद 🙏—

3 thoughts on “How to increase a memory power | मैमोरी पॉवर कैसे बढ़ाएं?

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