The magic of thinking big | बड़ी सोच का बड़ा जादू।

The magic of thinking big | बड़ी सोच का बड़ा जादू।

The magic of thinking big

The magic of thinking big | बड़ी सोच का बड़ा जादू।

बड़ी सोच का बड़ा जादू पुस्तक, डेविड जे. श्वार्ट्ज द्वारा लिखित The magic of thinking big की हिंदी translation है। इस पुस्तक (The magic of thinking big | बड़ी सोच का बड़ा जादू।) में यह बताया गया है कि आप बड़ा सोचें और फिर वो सब प्राप्त करें जिसकी आपको हमेशा चाह थी।

अधिक कमाई, आर्थिक सुरक्षा, प्रभावशाली व्यक्तित्व, मधुर संबंध और खुशहाल जीवन के लिए लेखक ने इस बुक में बहुत से सिद्धांत बताए हैं। जिनका अमल करके आप अपने जीवन में सफल हो सकते हैं।

इस पुस्तक के मूलभूत सिद्धांत और विचार, महान और श्रेष्ठ तरीके से सोचने वाले विचारकों से लिए गए हैं। जैसे प्रॉफेट डेविड, जिन्होंने लिखा था, “जैसा आप अपने दिल में सोचते हैं, आप वैसे ही होते हैं।” इमर्सन, जिन्होंने कहा था, “महान लोग वो होते हैं जो यह देख सकते हैं कि विचार ही दुनिया पर शासन करते हैं।”

मिल्टन, जिन्होंने पैराडाइज लॉस्ट में लिखा है, “मस्तिष्क का अपना स्थान निश्चित होता है और यह स्वर्ग को नर्क बना सकता है और नर्क को स्वर्ग।” विलियम शेक्सपियर जैसे महान व्यक्ति का कहना था, “कोई भी चीज बुरी या अच्छी नहीं होती, हमारा नजरिया (attitude) ही उसे अच्छा या बुरा बनाता है।”

बड़ी सोच रखें, इससे आप अपने जीवन में बड़े बन सकेंगे। आपको बड़े – बड़े सुख मिलेंगे और आपकी उपलब्धियां भी बड़ी होंगी। आपकी आमदनी बड़ी होगी और आपके दोस्त भी बड़े होंगे। तो वादे बहुत हो चुके। अब शुरू करें और अभी। जानें कि आप अपनी सोच को किस तरह अलादीन के चिराग की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। महान दार्शनिक डिजराइली के इस विचार से शुरू करें, “जिंदगी इतनी छोटी है कि इसे घटिया नहीं होना चाहिए।”

Believe that you can be successful and you will be | विश्वास करें कि आप सफल हो सकते हैं और आप हो जाएंगे।

सफलता का अर्थ है प्रशंसा का पात्र बनना, लीडर बनना, अपने बिजनेस और सामाजिक जीवन में सम्मान पाना। सफलता का मतलब है आत्म – सम्मान, जिंदगी का असली सुख और जीवन में संतुष्टि। जो लोग आप पर निर्भर हैं उनके लिए अधिक से अधिक करने की क्षमता। हर इंसान सफलता चाहता है और हर कोई ये चाहता है कि उसे जिंदगी का हर सुख मिले। कोई भी औसत जिंदगी नहीं जीना चाहता।

लेखक ने The magic of thinking big book में ये उदाहरण दिया है कि आप यदि सचमुच विश्वास करें कि आप पहाड़ हिला सकते हैं तो आप हिला सकते हैं। अधिकतर लोगों को यह विश्वास ही नहीं होता है कि उनमें पहाड़ हिलाने की क्षमता है।

इसका परिणाम यह होता है कि वे ऐसा कभी नहीं कर पाते। केवल इच्छा करने भर से आप लीडर नहीं बन जाते। केवल इच्छा करने भर से आप पांच बेडरूम और तीन बाथरूम वाले घर के मालिक नहीं बन जाते।

परन्तु अगर आप स्वयं में विश्वास रखते हैं तो आप पहाड़ को हिला सकते हैं। विश्वास के सहारे आप सफलता हासिल कर सकते हैं। विश्वास की शक्ति के बारे में कुछ भी जादुई या रहस्यमय नहीं है। Believe इस तरह काम करता है। “मुझे विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूं” वाला रवैया (attitude) हमें वह शक्ति, योग्यता और ऊर्जा प्रदान करता है जिसके सहारे हम वह काम कर पाते हैं।

जब आपको यह यकीन होता है कि आप कोई काम कर सकते हैं, तो आपको अपने आप पता चल जाता है कि इसे कैसे किया जा सकता है। विश्वास, दृढ़ विश्वास, मस्तिष्क को प्रेरित करता है कि वह लक्ष्य को प्राप्त करने के तरीके, साधन और उपाय खोजे। और यदि आप यकीन कर लें कि आप सफल हो सकते हैं, तो इससे दूसरे भी आप पर विश्वास करने लगते हैं।

How to develop the power of believe | विश्वास की शक्ति को किस तरह विकसित करें।

विश्वास की शक्ति को विकसित करने के लिए तीन उपाय किए जा सकते हैं :-

  1. सफलता की बात सोचें, असफलता की बात न सोचें। जब आपके सामने कोई कठिन परिस्थिति आए, तो सोचें “मैं जीत जाऊंगा।” जब आप किसी से प्रतियोगिता करें, तो सोचें, “मैं सर्वश्रेष्ठ हूं।” जब अवसर नजर आये तो सोचें, “मैं इसे कर सकता हूं।” अपनी चिंतन प्रक्रिया पर यह विचार हावी हो जाने दें, “मैं सफल होकर दिखाऊंगा।” सफलता के बारे में सोचने से आपका दिमाग ऐसी योजना बना लेता है जिससे आपको सफलता प्राप्त होती है। असफलता के बारे में सोचने से इसका ठीक उल्टा होता है।
  2. अपने आपको बार – बार याद दिलाएं कि आप जितना समझते हैं, आप उससे कहीं बेहतर हैं। सफल लोग सुपरमैन नहीं होते। सफलता के लिए सुपर – इंटलेक्ट का होना जरूरी नहीं है, ना ही सफलता के लिए किसी जादुई शक्ति या रहस्यमयी तत्व की आवश्यकता होती है। सफल लोग भी साधारण ही होते हैं लेकिन उन्हें अपने आप पर विश्वास होता है और अपनी क्षमताओं पर विश्वास होता है।
  3. बड़ी सोच में विश्वास करें। आपकी सफलता का आकार कितना बड़ा होगा, यह आपके विश्वास के आकार से तय होता है। यदि आपके लक्ष्य छोटे होंगे तो आपकी उपलब्धियां भी छोटी होंगी। और अगर आपके लक्ष्य बड़े होंगे तो आपकी सफलता भी बड़ी होगी।

“जो भी लीडर बनना चाहता है उसे स्वयं के और स्वयं की कंपनी के विकास कि योजना बना लेनी चाहिए और इसका दृढ़ – निश्चय कर लेना चाहिए। कोई व्यक्ति दौड़ में आगे रहेगा या पीछे रह जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी तैयारी कैसी है। यह ऐसी चीज है जिसमें समय लगता है, मेहनत लगती है और इसमें त्याग की आवश्यकता होती है। आपके लिए यह कोई दूसरा नहीं कर सकता।”

– राल्फ़ जे. कॉर्डिनर

Quit making excuses | बहाना बनाना छोड़ें।

बहाना बनाने की आदत असफलता की निशानी है। लेखक ने इस बीमारी का नाम अपेंडिसाइटिस के तर्ज पर बहानासाइटिस (Excusitis) का नाम दिया है। असफल लोगों को दिमाग की यह भयानक बीमारी होती है। आप पाएंगे कि excusitis की बीमारी सफल और असफल व्यक्तियों के बीच का सबसे बड़ा अंतर होती है।

विचारों की इस बीमारी का शिकार व्यक्ति इस तरह से सोचता है : “मेरी हालत उतनी अच्छी नहीं है, जितनी कि होनी चाहिए। अब मैं लोगों के सामने अपनी इज्जत बचाने के लिए कौन सा बहाना बना सकता हूं? बुरी सेहत, शिक्षा का अभाव, ज्यादा उम्र, कम उम्र, बदकिस्मती, व्यक्तिगत विपत्तियां, बुरी पत्नी या मां – बाप की गलत परवरिश।”

असफलता की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जब किसी अच्छे बहाने को चुन लेता है, तो वह उसे कसकर जकड़ लेता है। फिर वह इस बहाने के सहारे लोगों को और खुद को समझाता है कि वह जीवन में आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा है। और हर बार जब यह बीमार व्यक्ति बहाना बनाता है तो वह बहाना उसके अवचेतन मन में और गहराई तक चला जाता है। जब हम उनमें दोहराव की खाद डालते हैं तो विचार, चाहे सकारात्मक हों या नकारात्मक, ज्यादा तेजी से फलने – फूलने लगते हैं। इसलिए अच्छा सोचें और बड़ा सोचें।

Positive and big thinking makes you successful | सकारात्मक और बड़ी सोच आपको सफल बनाती है।

दरअसल महत्त्व इस बात का नहीं है कि आप में कितनी बुद्धि है, बल्कि इस बात का है कि जो आपके पास है आप उसका उपयोग किस तरह करते हैं। आपकी बुद्धि की मात्रा से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है वह चिंतन या वह नजरिया जो आपकी बद्धि को दिशा दिखा रहा है। किसी

काम में जुटे रहिए जब तक कि वह पूरा न हो जाए – यही असली पते की बात है। आलसी बुद्धि किस काम की? अक्सर जुटे रहने वाला व्यक्ति उस बद्धिमान और प्रतिभाशाली व्यक्ति से ज्यादा सफल होता है जो कोई काम पूरा नहीं करता है। जुटे रहने की क्षमता ही योग्यता का 95 प्रतिशत हिस्सा है।

महान वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने हमें एक बड़ा सबक सिखाया है। उनका मानना था कि हमें अपने दिमाग को तथ्यों या जानकारी का गोदाम बनाने से बचना चाहिए। इसके बजाय यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने दिमाग में सकारात्मक और बड़ी सोच रखें।

जब आप अपने दिमाग को नकारात्मक कर लेते हैं और सोचते हैं कि अब तो समय निकल चुका है, तभी सचमुच में समय निकलता है। यह सोचना छोड़ दें, “मुझे यह काम बहुत पहले शुरू कर देना चाहिए था।” यह असफलता की सोच है। इसके बजाय यह सोचें, “मैं अब शुरू करने जा रहा हूं, मेरा सर्वश्रेष्ठ समय अभी बाकी है।” सफल लोग भी इसी तरह सोचते हैं। वे हमेशा अपनी सोच बड़ी रखते हैं।

Build confidence and drive fear | विश्वास जगाएं और डर भगाएं।

वास्तव में डर एक शक्तिशाली भावना है। किसी न किसी रूप में डर लोगों को वह हासिल करने से रोकता है जो वे जीवन में हासिल करना चाहते हैं। यह सफलता का नम्बर एक दुश्मन है। डर लोगों को अवसर का लाभ उठाने से रोकता है। यह लोगों को शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है।

हम अपने मानसिक इंफेक्शन को भी उसी तरह दूर कर सकते हैं जिस तरह शारीरिक इंफेक्शन को दूर करते हैं। यानी इसका इलाज करके। इसके लिए हमें सबसे पहले उपचार के पहले की तैयारी करनी होगी। और यह जानना होगा कि आत्मविश्वास आसमान से आकर हमारे दिमाग में नहीं घुसता बल्कि हासिल किया जाता है, विकसित किया जाता है। जिन लोगों में confidence प्रचुरता में होता है उन्होंने इसे धीरे – धीरे हासिल किया है।

जब आप कठिन समस्याओं का सामना करते हैं तो तब तक आप दलदल में फंसे रहते हैं जब तक कि कर्म नहीं करते। आशा से शुरुआत होती है परन्तु जीतने के लिए आशा के साथ – साथ कर्म की भी जरूरत होती है। कर्म के सिद्धांत पर अमल करें। अगली बार जब भी आपको डर लगे, चाहे डर छोटा हो या बड़ा, अपने आपको संभालें। फिर इस सवाल का जवाब ढूंढे : किस तरह के काम से मैं अपने डर को जीत सकता हूं। अपने डर का कारण खोज लें। फिर उचित कदम उठाएं।

अपनी यादों (सोच) के बैंक में केवल सकारात्मक विचार ही जमा करें। इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि हर व्यक्ति के जीवन में अप्रिय, मुश्किल एवम् हतोत्साहित करने वाली घटनाएं होती हैं। परन्तु इन घटनाओं के प्रति असफल और सफल लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग – अलग होती हैं।

याद रखें, झिझकने से आपका डर और बढ़ता है, कम नहीं होता। इसलिए देर न करें, बल्कि तत्काल काम में जुट जाएं।

How to think big | बड़ा कैसे सोचें।

हजारों सालों से दार्शनिक हमें यह अच्छी सलाह देते आ रहे हैं : खुद को जानें। परन्तु अधिकतर लोग इस सलाह का मतलब यह निकालते हैं कि खुद के नकारात्मक पहलू को जानें। हमें अपनी कमियां पता हों; अच्छी बात है। इनसे हमें यह पता चलता है कि इन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

बड़े चिंतकों में अपने और दूसरों के मस्तिष्क में सकारात्मक, प्रगतिशील और आशावादी तस्वीरें बनाने की कला होती है। बड़ी सोच के लिए हमें ऐसे शब्दों और वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए जो बड़े, सकारात्मक मानसिक चित्र प्रदान कर सकें।

वर्तमान में चीजें कैसी हैं के बजाय, यह देखें कि वे भविष्य में कैसी हो सकती हैं। कल्पना शक्ति से हर चीज ज्यादा कीमती बन जाती है। बड़ा चिंतक हमेशा इस बात की कल्पना कर लेता है कि भविष्य में क्या किया जा सकता है। वह केवल वर्तमान में ही नहीं उलझा रहता।

दुनिया हम पर कीमत का टैग लगाती है वह उस टैग के अनुरूप ही होता है जो हम खुद पर लगाते हैं। हम सभी अपने आस – पास के माहौल से प्रभावित होते हैं। हमारी सोच हमारे आस – पास की सोच का प्रोडक्ट होती है। और हमारे आस – पास की अधिकतर सोच छोटी होती हैं, बड़ी नहीं। आपके चारों तरफ ऐसा माहौल है जो आपको पीछे धकेलना चाहता है।

Benefits of big thinking | बड़ी सोच के फायदे।

बड़ी सोच के बहुत से जादुई फायदे हो सकते हैं। इनमे से कुछ निम्नलिखित हैं :-

  1. अपने आप को सस्ते में न बेचें। अपने गुणों, अपनी योग्यताओं पर ध्यान केंद्रित करें। यह जान लें कि आप जितना समझते हैं, उससे कहीं बेहतर हैं।
  2. बड़े चिंतक कि शब्दावली का प्रयोग करें। बड़े, प्रभावशाली और आशावादी शब्दों का प्रयोग करें। ऐसे शब्दों का प्रयोग करें जिनसे विजय, आशा, सुख और आनंद के भाव निकलते हों।
  3. अपनी दृष्टि को विस्तारित होने दें। सिर्फ यह न देखें कि क्या है, बल्कि यह भी देखें कि क्या हो सकता है। लोगों, चीजों और खुद का मूल्य बढ़ाने का अभ्यास करें।
  4. अपनी नौकरी के बारे में बड़ा दृष्टिकोण रखें। सोचें और सचमुच सोचें कि आपकी वर्तमान नौकरी महत्त्वपूर्ण है। आप अपनी वर्तमान नौकरी के बारे में क्या सोचते हैं, इसी बात पर आपका अगला प्रोमोशन निर्भर करता है।
  5. छोटी – छोटी बातों से ऊपर उठें। अपने ध्यान को बड़े लक्ष्यों पर लगाएं। छोटे मामलों में उलझने के बजाय खुद से पूछें, “क्या यह सचमुच महत्त्वपूर्ण है?”

How to think and dream creatively | रचनात्मक तरीके से कैसे सोचें और सपने देखें?

रचनात्मक सोच का अर्थ है किसी भी काम को करने के नए, सुधरे हुए तरीके खोजना। हर जगह सफलता इसी बात में छुपी होती है कि आप चीजों को बेहतर तरीके से करने के उपाय कैसे सोचते हैं; फिर चाहे वह सफलता घर में हो, काम – धंधे या समाज में हो। अपनी रचनात्मक सोच की योग्यता को किस तरह विकसित कर सकते हैं और इसकी आदत कैसे डाल सकते हैं।

कदम एक : विश्वास करें कि कोई भी कार्य किया जा सकता है। एक मूलभूत सत्य जान लें- किसी भी कार्य को करने के लिए आपको पहले यह विश्वास करना होगा कि इसे किया जा सकता है। एक बार आप यह सोच लें कि यह काम संभव है तो फिर आप उसे करने का तरीका भी सोच लेंगे।

कदम दो : जब आप यह विश्वास करते हैं कि कोई काम असंभव है, तो आपका दिमाग आपके सामने यह सिद्ध कर देता है कि यह क्यों असंभव है। परन्तु जब आप विश्वास करते हैं और सचमुच विश्वास करते हैं कि कोई काम किया जा सकता है, तो आपका दिमाग आपके लिए काम में जुट जाता है और तरीके ढूंढने में आपकी मदद करता है।

अपने शब्दकोश से असंभव शब्द को निकाल फेंकें। इस शब्द को कभी अपनी जुबान पर अपने दिमाग में न लाएं। असंभव असफलता का शब्द है। जब आप कहते हैं, “यह असंभव है” तो आपके दिमाग में ऐसे विचार आ जाते हैं जो साबित कर देते हैं कि आप सही सोच रहे हैं।

बहुत से यथास्थितिवादी (status-quoers) अब भी मानते हैं कि इंसान की जगह अंतरिक्ष में नहीं है। एक चोटी के मिसाइल विशेषज्ञ ने इस तरह की सोच का जवाब दिया है। डॉ. वॉन ब्रॉन का कहना है, “मनुष्य की जगह वहीं है, जहां मनुष्य जाना चाहता है।”

The magic of thinking big

You will become what you think | आप जैसा सोचेंगे, वैसे बनेंगे।

सोच के कारण ही ऐसा होता है। दूसरे लोग हममें वही देखते हैं, जो हम अपने आप में देखते हैं। हमें उसी तरह का व्यवहार मिलता है जिसके काबिल हम खुद को समझते हैं। वह व्यक्ति जो खुद को हीन समझता है, चाहे उसकी योग्यताएं कितनी ही क्यों न हों, वह हीन ही बना रहेगा। आप जैसा सोचते हैं, वैसे ही काम करते हैं। जो लोग यह महसूस करते हैं कि वे महत्त्वपूर्ण नहीं हैं, वे सचमुच महत्त्वपूर्ण नहीं होते।

दूसरी ओर, जो व्यक्ति यह समझता है कि वह कोई काम कर सकता है, वह सचमुच उस काम को कर लेगा। महत्त्वपूर्ण बनने के लिए यह सोचना जरूरी है कि हम महत्त्वपूर्ण हैं। सचमुच ऐसा सोचें। तभी दूसरे लोग भी हमारे बारे में ऐसा सोचेंगे। “आप क्या सोचते हैं, इससे यह तय होता है कि आप कैसा काम करते हैं। और आप क्या करते हैं, इससे यह तय होता है, कि दूसरे आपके साथ कैसा व्यवहार करते हैं।”

जीतने का सीधा तरीका यह जानना है कि आप अपने बारे में सकारात्मक सोच कर अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। दूसरे लोग आपकी योग्यता का अनुमान आपके काम से लगाते हैं। और आपके काम आपके विचारों से नियंत्रित होते हैं।

आप जो सोचते हैं आप वही होते हैं। उत्साहपूर्ण सोचें। हमेशा आशावादी, प्रगतिशील विचार रखें, ” यह बहुत बढ़िया काम है और मैं यह काम कर सकता हूं।” उत्साह के बारे में सोचें और आप उत्साही बन जाएंगे। अपने बारे में बड़ी बातें सोचें (The magic of thinking big | बड़ी सोच का बड़ा जादू।) में आपको यही सिखाया जा रहा है।

How to convert defeat into victory | हार को जीत में कैसे बदलें।

हारने का मतलब यह नहीं है कि आपका सब कुछ चला गया। असली आनंद तो आपको तभी मिलेगा जब आप हारने के बाद जीत महसूस करोगे या उसे प्राप्त करोगे। आप महान लोगों की जीवनियां पढ़ें, यहां आप पाएंगे कि ये सभी लोग किसी न किसी मोड़ पर असफलता के सामने अपने घुटने टेक सकते थे।

बिना विरोध, मुश्किलों और असफलताओं के बड़ी सफलता प्राप्त करना संभव नहीं है। परन्तु यह संभव है कि आप इन असफलताओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा (motivation) बना लें। हम हार को जीत में बदल सकते हैं। सबक सीखो, उसे अपने जीवन में उतारो, पराजय की तरफ पीछे मुड़कर देखो और मुस्कुराओ। “हार केवल एक मानसिक स्थिति है और इससे ज्यादा कुछ नहीं।”

यदि हम कुछ सीखें तो असफल होना भी फायदेमंद साबित हो सकता है। हम इंसान भी अजीब होते हैं। अपनी सफलताओं का श्रेय तो हम पूरा लेना चाहते हैं। जब हम जीतते हैं तो पूरी दुनिया को इस बारे में बताना चाहते हैं।

यह स्वाभाविक है कि हम लोगों के मुंह से यह सुनना चाहते हैं, “यही वह व्यक्ति है जिसने इतना बड़ा काम किया है।” परन्तु अपनी असफलता का श्रेय व्यक्ति तुरंत किसी दूसरे के मत्थे मढ़ देता है।

Persistence and practicality | लगन और प्रयोगशीलता।

खुद का अच्छा आलोचक होना अच्छी बात है, बशर्ते कि आलोचना रचनात्मक हो। इससे आपको व्यक्तिगत शक्ति और योग्यता बढ़ाने में मदद मिलती है, जो सफलता के लिए बहुत आवश्यक है। रचनात्मक रूप से खुद की आलोचना करें।

अपनी कमजोरियों को स्वीकारने में न हिचकिचाएं। सच्चे प्रोफेशनल बनें। वे अपनी गलतियों और कमजोरियों को ढूंढते हैं और फिर उन्हें दूर करते हैं। इसी कारण वे सफल प्रोफेशनल बनते हैं।

एडीसन के बारे में कहा जाता है कि वे अमेरिका के सबसे लगनशील वैज्ञानिकों में से एक थे। उन्होंने बिजली के बल्ब की खोज से पहले हजारों प्रयोग किए। परन्तु यह ध्यान दें : एडीसन में लगन के साथ ही प्रयोगशीलता भी थी। वे बिजली के बल्ब को विकसित करने के अपने लक्ष्य में लगे रहे। परन्तु उन्होंने लगन के साथ प्रयोगशीलता को भी मिला दिया।

एक ही दिशा में लगन से जुटे रहना सफलता की गारंटी नहीं है। परन्तु लगन और प्रयोगशीलता के समन्वय से सफलता की गारंटी मिल जाती है। लगनशीलता के साथ प्रयोगशीलता का समन्वय कर लें। अपने लक्ष्य को बनाए रखें, परन्तु पत्थर की दीवार से अपना सिर न टकराते रहें। नई शैलियों का प्रयोग करें। प्रयोगशील बनें।

दोस्तो हमारी इस पोस्ट (The magic of thinking big | बड़ी सोच का बड़ा जादू।) के द्वारा यदि आपको अपने जीवन में कोई लाभ होता है या खुद में कुछ बदलाव होते हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी। आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। यदि आप सोचते हैं कि इस लेख से दूसरों को भी फायदा हो तो इसे शेयर अवश्य करें।

-🙏 धन्यवाद 🙏 –

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